फर्जी दस्तावेजों से 7.30 लाख रुपये का लोन, Delhi Police ने साइबर फ्रॉड रैकेट का किया भंडाफोड़

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (03 October 2026): दिल्ली पुलिस की साइबर नॉर्थ थाना पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए लोन दिलाने वाले कथित साइबर फ्रॉड रैकेट (Cyber Fraud) का खुलासा करते हुए एक आरोपी को सोनीपत से गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने एक महिला उद्यमी की कंपनी के नाम पर उसकी जानकारी के बिना 7.30 लाख रुपये का बिजनेस लोन हासिल किया था। मामले की जांच में पुलिस को अलग-अलग राज्यों से जुड़े छह साइबर फ्रॉड की शिकायतें भी मिली हैं। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल फोन और तीन सिम कार्ड बरामद किए हैं।

पुलिस के अनुसार, बुराड़ी निवासी महिला ने शिकायत दी थी कि मई 2022 से वह अपनी कंपनी चला रही हैं। जुलाई 2025 में उन्हें फोन के जरिए जानकारी मिली कि दिसंबर 2023 में उनकी कंपनी के नाम पर 7.30 लाख रुपये का लोन लिया गया था। शुरुआत में उन्होंने इसे फर्जी कॉल समझकर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन जनवरी 2026 में बेटी की शिक्षा के लिए लोन लेने के दौरान उन्हें पता चला कि अनधिकृत बिजनेस लोन के कारण उनका CIBIL स्कोर प्रभावित हुआ है। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उनके PAN, GST विवरण, हस्ताक्षर और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल कर लोन लिया गया और रकम उनके नाम से खोले गए बैंक खाते में जमा कराई गई।

जांच के दौरान पुलिस टीम ने CDR, IMEI डिटेल, IP लॉग और बैंक खातों में हुए लेनदेन का विश्लेषण किया। करीब 100 संदिग्ध मोबाइल नंबर और उनसे जुड़े IMEI की निगरानी के बाद पुलिस को आरोपियों के तार सोनीपत और द्वारका से जुड़े मिले। पुलिस के मुताबिक, Lendingkart Finance Ltd. से स्वीकृत रकम कोटक महिंद्रा बैंक के एक खाते में पहुंची, जहां से दो बार में 50-50 हजार रुपये यानी कुल एक लाख रुपये साहिल के खातों में ट्रांसफर किए गए। IP लॉग और कॉल डिटेल के आधार पर जांच आगे बढ़ी और पुलिस टीम ने सोनीपत के गांव नाहरा में छापेमारी कर 36 वर्षीय साहिल को गिरफ्तार किया। एक अन्य आरोपी 34 वर्षीय महिला को 19 सितंबर 2026 को द्वारका के कैलाशपुरी इलाके से मामले में पकड़ा गया और उसे जांच में शामिल किया गया।

पुलिस की जांच में कथित तौर पर सामने आया कि आरोपी Telegram ग्रुप के जरिए लोगों को लोन दिलाने का झांसा देते थे और उनसे बैंक खाते, आधार, फोटो व अन्य व्यक्तिगत तथा वित्तीय दस्तावेज हासिल करते थे। पुलिस के मुताबिक, आरोपी करीब 30 प्रतिशत कमीशन लेता था और कुछ मामलों में बैंक खातों से जुड़े सिम कार्ड अपने नियंत्रण में रखता था। आरोप है कि PAN कार्ड, GST और उद्यम रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेजों में एडिटिंग कर उनका इस्तेमाल लोन आवेदन में किया जाता था। पुलिस का कहना है कि आरोपी ने Lendingkart के मोबाइल एप के जरिए 5-6 लोन हासिल करने की बात स्वीकार की है, जबकि 50-60 अन्य इंस्टेंट लोन मामलों में उसकी भूमिका की जांच की जा रही है।

पुलिस को आरोपी के मोबाइल फोन से WhatsApp चैट भी मिली हैं, जिनमें वॉलेट और वित्तीय लेनदेन से संबंधित बातचीत होने की बात कही गई है। जांच में जुड़े बैंक खातों में कुल डेबिट-क्रेडिट लेनदेन पांच करोड़ रुपये से अधिक का पाया गया है। पुलिस अब डिजिटल उपकरणों, बैंकिंग रिकॉर्ड और लोन दस्तावेजों की जांच कर कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और पीड़ितों की पहचान करने में जुटी है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच जारी है और सामने आए अन्य साइबर फ्रॉड मामलों के साथ आरोपियों के संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।


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