10 महीने में 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों पर दो चुनाव आयुक्तों ने दर्ज कराई आपत्ति

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (23 September 2026): मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के भीतर पिछले 10 महीनों में कई महत्वपूर्ण फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों ने रिकॉर्ड पर आपत्ति दर्ज कराई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों आयुक्तों ने करीब 14 बार आयोग के कदमों पर असहमति जताई। ये आपत्तियां मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने, नाम हटाने, चुनावी डेटा तक पहुंच और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अन्य फैसलों को लेकर बताई गई हैं।

एसआईआर प्रक्रिया और नए मतदाताओं को लेकर मतभेद: रिपोर्ट के अनुसार, जून 2025 में शुरू हुई विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से जुड़े कामकाज को लेकर चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद सामने आए। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दो आयुक्तों ने नए मतदाता पंजीकरण, पुराने मतदाताओं के रिकॉर्ड, अपील दाखिल करने और SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने जैसे मुद्दों पर आपत्ति जताई। रिपोर्ट में इसे चुनाव आयोग के भीतर असामान्य स्तर का मतभेद बताया गया है।

मतदाता डेटा को लेकर भी उठे सवाल: इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव आयोग के भीतर मतदाता डेटाबेस तक पहुंच को लेकर भी असहमति रही। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ फैसलों में जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों की भूमिका और जानकारी तक उनकी पहुंच को लेकर सवाल उठे। दो चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर इस बात पर चिंता जताई कि मतदाता डेटा और उससे जुड़े फैसलों का नियंत्रण किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है।

कैबिनेट सचिव तक पहुंचा मामला: रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मतदाता डेटाबेस की सत्यता और उसकी प्रक्रिया को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव के कार्यालय तक भी अपनी बात पहुंचाई। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग के तत्कालीन और मौजूदा अधिकारियों के बीच मतदाता रिकॉर्ड और तकनीकी प्लेटफॉर्म से जुड़े विषयों पर मतभेद सामने आए। आयोग की ओर से इस रिपोर्ट में लगाए गए सभी दावों पर तत्काल कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं किया गया है।

फॉर्म-6 में बदलाव पर भी आपत्ति: रिपोर्ट के एक अन्य हिस्से में नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव का जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, दो चुनाव आयुक्तों ने नए मतदाताओं से अतिरिक्त घोषणाएं लेने वाले बदलाव पर आपत्ति दर्ज की और इसे नियमों के अनुरूप नहीं बताया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बदलाव के तहत पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं से कुछ अतिरिक्त जानकारी या घोषणा मांगी गई थी, जिस पर आयोग के भीतर असहमति सामने आई।

रिपोर्ट में आयोग के कामकाज को लेकर उठाए गए व्यापक सवाल: द इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट का एक हिस्सा चुनाव आयोग के भीतर शक्तियों के केंद्रीकरण और निर्णय प्रक्रिया को लेकर उठी आपत्तियों पर केंद्रित है। रिपोर्ट के अनुसार, दो आयुक्तों ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, नए मतदाताओं के पंजीकरण और चुनावी डेटा से जुड़े कई फैसलों पर रिकॉर्ड पर अपनी असहमति दर्ज कराई। हालांकि, रिपोर्ट में सामने आए ये दावे इंडियन एक्सप्रेस की जांच और संबंधित सूत्रों पर आधारित हैं; इन्हें चुनाव आयोग की ओर से स्वतंत्र रूप से पुष्टि किए गए निष्कर्ष के रूप में नहीं प्रस्तुत किया गया है।


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