शालीमार बाग में बुलडोजर एक्शन, मदीना मस्जिद का हिस्सा भी ढहाया

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (23 September 2026): दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में मैक्स हॉस्पिटल रोड के चौड़ीकरण के लिए देर रात अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की गई। प्रशासन की इस कार्रवाई में सड़क किनारे बने कई मकानों और कथित अवैध कब्जों को हटाया गया, जबकि मदीना मस्जिद का भी एक हिस्सा बुलडोजर की कार्रवाई की चपेट में आया। कार्रवाई के दौरान इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन की कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया और मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई।

मस्जिद में रखी धार्मिक किताबों को लेकर इमाम का दावा: कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद एआईएमआईएम के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष शोएब जमाई देर रात करीब 11:30 बजे मौके पर पहुंचे और स्थानीय लोगों से मुलाकात की। उन्होंने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि मस्जिद के अंदर से कुरान और अन्य धार्मिक किताबें निकालने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। हालांकि, ये आरोप स्थानीय पक्ष की ओर से लगाए गए हैं। शोएब जमाई ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर भी निशाना साधते हुए कार्रवाई का विरोध किया और कहा कि प्रशासन को प्रभावित लोगों को उचित प्रक्रिया और सुनवाई का अवसर देना चाहिए।

इमाम ने उठाए कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल: मदीना मस्जिद के इमाम जरीफुर रहमान ने प्रशासन की ओर से मस्जिद को अवैध बताए जाने पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि शालीमार इलाके में बड़ी संख्या में मकान जीपीए के आधार पर बने हैं, ऐसे में केवल मस्जिद को अवैध निर्माण के तौर पर चिन्हित करना उचित नहीं है। इमाम के मुताबिक, मस्जिद प्रबंधन ने अदालत में अपना पक्ष और जरूरी दस्तावेज पेश किए थे। उनके अनुसार, एमसीडी ने सुनवाई के बाद मस्जिद को 15 दिनों के भीतर स्वयं हटाने या नगर निगम की कार्रवाई का सामना करने का नोटिस दिया था। इसके बाद मामले में दोबारा अदालत का रुख किया गया, जहां ग्राउंड फ्लोर को लेकर स्टे मिला, जबकि ऊपरी मंजिलों पर राहत नहीं मिली।

मस्जिद प्रबंधन ने अदालत में रखे पुराने निर्माण के दस्तावेज: मदीना मस्जिद के प्रेसिडेंट मोविन खान ने बताया कि प्रबंधन ने एमसीडी से संबंधित दस्तावेजों की स्पष्ट प्रतियां मांगी थीं और इसके बाद अपीलेट ट्रिब्यूनल का भी रुख किया गया। उनके मुताबिक, सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने बिजली मीटर वाले हिस्से को मान्यता प्राप्त हिस्सा माना, जबकि बाकी निर्माण को नया निर्माण बताया। प्रबंधन का दावा है कि मस्जिद की ऊपरी तीन मंजिलें वर्ष 2001 में बनाई गई थीं और इस संबंध में पुराना साइट प्लान भी अदालत में पेश किया गया था। उन्होंने दीवारों पर प्लास्टर की उम्र की जांच कराने की मांग भी की थी, लेकिन उनके अनुसार अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और ऊपरी मंजिलों को हटाने की अनुमति दी।


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