जंतर-मंतर प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पेलेट गन और हिंसा के आरोपों की होगी जांच

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (16 September 2026): जंतर-मंतर पर जुलाई में हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जांच का दायरा तय करते हुए पांच सदस्यीय हाई पावर कमेटी यानी एचपीईसी को जांच शुरू करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने समिति से प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन के इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित हिंसा, पुलिसकर्मियों के घायल होने और संपत्ति को हुए नुकसान समेत कई पहलुओं की जांच करने को कहा है। इसके साथ ही अदालत ने एक 14 वर्षीय प्रदर्शनकारी लड़की और उसके परिवार को सुरक्षा देने का भी निर्देश दिल्ली पुलिस को दिया है।

यह पूरा मामला 20 जुलाई को संसद तक निकाले गए एक मार्च से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रदर्शन नीट पेपर लीक के विरोध में शुरू हुआ था और प्रदर्शनकारियों ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया। इसके बाद सरकार की ओर से परीक्षा सुधारों को लेकर नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक समिति गठित किए जाने की जानकारी सामने आई। अब जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच आगे बढ़ेगी।

इससे पहले 10 सितंबर की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने जांच प्रक्रिया को लेकर कई निर्देश दिए थे। अदालत ने एचपीईसी से कहा कि गवाहों की पहचान गोपनीय रखी जाए और सबूत तथा संबंधित जानकारी जमा कराने के लिए अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाए। वहीं प्रदर्शन से जुड़े संवैधानिक सवालों, जिसमें फेस रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल का मुद्दा भी शामिल है, पर सुप्रीम कोर्ट खुद विचार करेगा। समिति के पुनर्गठन की मांग को लेकर दायर याचिकाओं को भी अदालत ने खारिज कर दिया।

मामले में 14 वर्षीय लड़की और उसके परिवार की सुरक्षा का मुद्दा भी अदालत के सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार परिवार ने खतरे की आशंका जताई थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जल्द जांच कर सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। यह मामला स्वतंत्र भारद्वाज से भी जुड़ा बताया गया है, जिन्हें लड़की के पिता पर हमले का दावा करने के बाद हिरासत में लिया गया था। लड़की की ओर से धमकी और कथित रूप से छेड़छाड़ की गई तस्वीरें फैलाने के आरोप लगाए गए हैं और मामले में एससी-एसटी एक्ट तथा पॉक्सो के तहत केस दर्ज होने की बात कही गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. मोनिका गुसाईं और सी. सोलोमन को न्याय मित्र नियुक्त किया है, जबकि एचपीईसी की अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। समिति अपनी जांच के आधार पर सिफारिशें दे सकती है, लेकिन उसे एफआईआर दर्ज कराने का अधिकार नहीं है। अब समिति की जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।


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