New Delhi News (31 August 2026): दिल्ली की पहचान बन चुके सिग्नेचर ब्रिज को लेकर जुलाई 2026 में हुए तकनीकी ऑडिट में रखरखाव से जुड़ी कई गंभीर कमियां सामने आई हैं। ऑडिट के दौरान ब्रिज के अलग-अलग हिस्सों की जांच की गई, जिसमें कई सेंसर के खराब या गायब होने, स्टील के हिस्सों में जंग लगने और नदी की ओर स्थित नींव की सुरक्षा व्यवस्था में खामियां मिलने की बात सामने आई है। ब्रिज की नींव, स्टील डेक, करीब 154 मीटर ऊंचे पायलन, स्टे केबल, बेयरिंग, एक्सपेंशन जॉइंट, एप्रोच स्ट्रक्चर, स्काईवॉक रैंप और ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम (BHMS) की स्थिति का भी आकलन किया गया।
ऑडिट में सबसे बड़ी चिंता ब्रिज के ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम (BHMS) को लेकर जताई गई है। यह सेंसर और सॉफ्टवेयर आधारित व्यवस्था है, जिसके जरिए पुल की संरचनात्मक स्थिति पर लगातार नजर रखी जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक कई सेंसर काम नहीं कर रहे थे, कुछ सेंसर गायब मिले और कुछ निष्क्रिय स्थिति में थे। अब इन्हें दुरुस्त करने के साथ निगरानी व्यवस्था को आधुनिक बनाने की योजना तैयार की जा रही है। प्रस्तावित सिस्टम के जरिए तापमान, दबाव, हवा, कंपन, झुकाव, जंग, यातायात और ब्रिज पर पड़ने वाले भार जैसे महत्वपूर्ण मानकों की निगरानी की जाएगी। इसके लिए नए डेटा सिस्टम और कंट्रोल रूम की व्यवस्था किए जाने का भी प्रस्ताव है।
ब्रिज की नदी की तरफ स्थित नींव के आसपास भी सुरक्षा संबंधी कमियां सामने आई हैं। ऑडिट में कटाव और सुरक्षा व्यवस्था में खराबी का उल्लेख किया गया है, हालांकि पानी के नीचे और जमीन के भीतर मौजूद हिस्सों की पूरी तरह जांच नहीं हो सकी। पानी का तेज बहाव और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां इन हिस्सों तक पहुंच में बाधा बनीं। ऐसे में रिपोर्ट में इन क्षेत्रों की विस्तृत तकनीकी जांच की सिफारिश की गई है। जरूरत पड़ने पर मलबा और गाद हटाने, खराब सुरक्षात्मक कंक्रीट की मरम्मत करने और नदी के बहाव से होने वाले कटाव को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं।
सिग्नेचर ब्रिज से जुड़े स्काईवॉक रैंप का स्टीलवर्क भी जांच में चिंता का कारण बना। ऑडिट के दौरान स्टील पर गंभीर जंग, सतह की परतें निकलने और सुरक्षात्मक कोटिंग खराब होने के संकेत मिले। कई जोड़, स्प्लाइस और फास्टनर्स भी जंग से प्रभावित पाए गए। इसके अलावा स्टील डेक में जंग, पायलन की कोटिंग खराब होने, स्टे केबल के एंकरिंग हिस्सों की सुरक्षा, वैक्स लीकेज, एक्सपेंशन जॉइंट की सफाई, ड्रेनेज व्यवस्था और कुछ पेंडुलम बेयरिंग से जुड़ी कमियों को भी रिपोर्ट में दर्ज किया गया है। प्रभावित हिस्सों की विस्तृत जांच के बाद जरूरी मरम्मत और सुधारात्मक कार्य किए जाने की तैयारी है।
रिपोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि मौजूदा ऑडिट मुख्य रूप से दृश्य निरीक्षण पर आधारित था। इसका मतलब है कि ब्रिज के उन अंदरूनी या ऐसे हिस्सों में छिपी संरचनात्मक खामियों की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता, जहां जांच टीम की पहुंच नहीं हो सकी। इसलिए बड़े मरम्मत कार्य शुरू करने से पहले जरूरत के मुताबिक विशेष जांच और तकनीकी परीक्षण कराने की सिफारिश की गई है। दिल्ली के लोक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से ब्रिज के रखरखाव और सुधार के लिए योजना तैयार की जा रही है। PWD मंत्री प्रवेश वर्मा के अनुसार ब्रिज कुछ महीने पहले ही विभाग को सौंपा गया है और अब इसके रखरखाव से जुड़ी जरूरतों पर काम किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पुल का प्रत्येक हिस्सा सुरक्षित और मजबूत बनाए रखना प्राथमिकता है।
सिग्नेचर ब्रिज की लंबी अवधि की सुरक्षा को देखते हुए ऑडिट में नियमित निरीक्षण व्यवस्था मजबूत करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक सामान्य स्थिति में हर महीने निरीक्षण और हर छह महीने में विस्तृत जांच की जानी चाहिए। अत्यधिक बारिश, बाढ़, किसी बड़े हादसे या ऐसी अन्य घटना के बाद भी विशेष निरीक्षण करने का सुझाव दिया गया है, जिससे पुल की संरचना पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा ब्रिज के रखरखाव और जरूरी सुधार के लिए पांच साल की योजना प्रस्तावित की गई है। अब सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यह होगी कि ऑडिट में सामने आई कमियों को समय रहते दूर किया जाए और निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए, ताकि राजधानी के इस महत्वपूर्ण पुल की सुरक्षा को लेकर किसी तरह का जोखिम न रहे।
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