9 सितंबर को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का घेराव करेगा किसान संघर्ष मोर्चा, लंबित मांगों पर वार्ता न होने से बढ़ा आक्रोश
टेन न्यूज नेटवर्क
Greater Noida News (25/08/2026): किसानों की लंबित समस्याओं और लगातार मिल रहे कथित आश्वासनों के बावजूद समाधान की दिशा में ठोस पहल न होने से किसान संघर्ष मोर्चा ने आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है। मंगलवार को जैतपुर स्थित किसान सभा कार्यालय में हुई मोर्चे की कोर कमेटी की बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि 9 सितंबर को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर घेराव किया जाएगा।
बैठक में किसान नेताओं ने कहा कि 10 प्रतिशत आबादी प्लॉट, आबादी से जुड़े लंबित मामलों, अतिरिक्त मुआवजे, सर्किल रेट में संशोधन और नए भूमि कानून समेत कई मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन और प्राधिकरण स्तर पर बार-बार आश्वासन दिए गए, लेकिन किसानों के साथ अब तक कोई ठोस वार्ता नहीं हो सकी है।
लगातार टलती रही अधिकारियों से वार्ता
किसान संघर्ष मोर्चा के अनुसार, 17 जुलाई को 10 प्रतिशत आबादी प्लॉट समेत विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन किया गया था। उस दौरान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने किसानों को भरोसा दिलाया था कि एक सप्ताह के भीतर तीनों प्राधिकरणों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों के साथ उनकी वार्ता कराई जाएगी। मोर्चे का आरोप है कि इसके बाद कई बार तारीखें दी गईं, लेकिन वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी।
इसी के विरोध में मोर्चे ने 17 अगस्त को फिर आंदोलन का आह्वान किया। किसान नेताओं का आरोप है कि उस दिन पुलिस प्रशासन ने कई कार्यकर्ताओं को उनके घरों में नजरबंद किया, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण गोलचक्कर पर किसानों पर लाठीचार्ज किया और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा ग्रामीणों को पांच-पांच लाख रुपये के मुचलके से संबंधित नोटिस दिए जाने का भी दावा किया गया।
मोर्चे ने कहा कि इन परिस्थितियों के बावजूद किसानों ने आंदोलन को शांतिपूर्ण ढंग से जारी रखा और जैतपुर स्थित किसान सभा कार्यालय से प्रदर्शन करते हुए बड़ी संख्या में गिरफ्तारी दी। इसके बाद पुलिस कमिश्नर के साथ दो घंटे से अधिक समय तक वार्ता हुई। किसानों के मुताबिक, इस बैठक में 18 अगस्त को तीनों प्राधिकरणों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों के साथ बैठक की तारीख तय करने तथा किसानों के अन्य मुद्दों पर जानकारी देने का आश्वासन मिला था।
हालांकि, मोर्चे का कहना है कि 18 अगस्त से 25 अगस्त तक लगातार वार्ता की तारीख आगे बढ़ती रही। 19 से 25 अगस्त तक अलग-अलग तारीखों पर आश्वासन मिलने के बाद अब 27 अगस्त को पुलिस कमिश्नर स्तर पर वार्ता की बात कही गई है। किसान नेताओं का कहना है कि इस बैठक में भी तीनों प्राधिकरणों के सीईओ के साथ किसानों की वास्तविक वार्ता कब होगी, इसे लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
किसान संघर्ष मोर्चा ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन ने किसानों को करीब दो महीने तक आश्वासन देकर वास्तविक मुद्दों पर बातचीत को टाल दिया। मोर्चे के अनुसार, इससे किसानों में असंतोष बढ़ रहा है। किसान नेताओं ने इसे उनके लोकतांत्रिक अधिकारों और वर्षों से उठाई जा रही मांगों की अनदेखी बताया।
मोर्चे का आरोप है कि पुलिस प्रशासन आंदोलन को समाप्त कराने या टालने की कोशिश कर रहा है, जबकि किसानों की मूल समस्याओं के समाधान के लिए प्राधिकरणों के स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की गई। किसान नेताओं ने कहा कि वर्षों से आश्वासन दिए जाने के बावजूद समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
आबादी के हजारों मामले लंबित होने का दावा
किसान नेताओं ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्रों में आबादी से जुड़े बड़ी संख्या में मामले लंबित होने का दावा किया। उनके मुताबिक, नोएडा में करीब 3,800, ग्रेटर नोएडा में 854 और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में लगभग 900 आबादी संबंधी प्रकरण लंबित हैं। मोर्चे ने यह भी दावा किया कि ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में 500 से अधिक किसान अभी तक 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे से वंचित हैं। किसान नेताओं के अनुसार, करीब 14 वर्षों से सर्किल रेट में प्रभावी वृद्धि नहीं होने के कारण किसानों को मिलने वाले मुआवजे पर भी इसका असर पड़ा है।
किसानों ने नोएडा में किसान कोटे के प्लॉटों के आवंटन का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप है कि किसानों के हिस्से के हजारों प्लॉट बिल्डरों को आवंटित किए जा चुके हैं, जबकि किसानों को उनकी जमीन के बदले अपेक्षाकृत कम दर पर समझौता करने के लिए कहा जा रहा है। मोर्चे ने इस नीति को किसान हितों के खिलाफ बताते हुए किसी भी कीमत पर अधिकारों से समझौता न करने की बात कही।
अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप
किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर खलीफा ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्राधिकरण के अधिकारियों की प्राथमिकता किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलन को दबाना और टालना रह गई है। उन्होंने बिल्डरों को लाभ पहुंचाने और शासन स्तर पर वास्तविक स्थिति से अलग जानकारी दिए जाने का भी आरोप लगाया।
किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरन प्रधान ने कहा कि किसानों के सामने अब आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों की ओर से लगातार वादे किए जा रहे हैं, लेकिन उनका पालन नहीं हो रहा है। किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि किसान संघर्ष मोर्चा अब तक धैर्य और अनुशासन के साथ लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठाता रहा है। उनके अनुसार, इसके बावजूद किसानों के खिलाफ मुकदमे, गिरफ्तारियां और बल प्रयोग जैसी कार्रवाई की गई। उन्होंने 17 अगस्त को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में किसानों के धरना स्थल पर मिट्टी डालकर उसे कब्जे में लेने की कार्रवाई को गैरकानूनी और अलोकतांत्रिक बताया।
10 प्रतिशत प्लॉट के प्रस्ताव को लागू करने की मांग
किसान सभा के महासचिव संदीप भाटी ने कहा कि किसानों की प्रमुख मांगों में 10 प्रतिशत आबादी प्लॉट, नए भूमि कानून, आबादी के मामलों और अन्य अधिकारों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 2023 के किसान आंदोलन के बाद 10 प्रतिशत प्लॉट से संबंधित प्रस्ताव प्राधिकरण बोर्ड से पारित होकर शासन की मंजूरी के लिए भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मौजूदा मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पद संभाले करीब तीन वर्ष हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद आबादी से जुड़ा कोई मामला समाधान तक नहीं पहुंचा। वर्ष 2023 में सर्किल रेट के पुनरीक्षण का आश्वासन दिए जाने के बावजूद उस पर भी अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने की बात किसान नेताओं ने कही।
किसान परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता उदल आर्य ने आंदोलन को निर्णायक चरण में पहुंचने की बात कही। उन्होंने भाजपा सरकार और अधिकारियों पर किसान विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया तथा कहा कि गौतमबुद्ध नगर के भाजपा जनप्रतिनिधियों ने किसानों की समस्याओं पर अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई है।
किसान एकता संघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता उम्मेद त्यागी ने कहा कि किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और मांगों के समाधान तक पीछे नहीं हटेंगे।
9 सितंबर को बड़े आंदोलन का ऐलान
कोर कमेटी की बैठक के बाद किसान संघर्ष मोर्चा ने स्पष्ट किया कि अब केवल मौखिक आश्वासनों के आधार पर आंदोलन स्थगित नहीं किया जाएगा। 9 सितंबर को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर धरना-प्रदर्शन और घेराव किया जाएगा। मोर्चे ने शासन और तीनों प्राधिकरणों से किसानों की सभी लंबित समस्याओं पर तत्काल वार्ता शुरू कर समाधान की स्पष्ट और समयबद्ध प्रक्रिया तय करने की मांग की।
मोर्चे ने कहा कि किसान लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं तथा सरकार और प्रशासन को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। बैठक में सुखबीर खलीफा, सोरन प्रधान, डॉ. रुपेश वर्मा, संदीप भाटी, उदल आर्य, उम्मेद त्यागी, सुशांत भाटी, सुशील सिंहपुर, सुरेश यादव, अशोक भाटी, सुमित एडवोकेट, मोनू मुखिया, निशांत रावल, सचिन एडवोकेट समेत किसान संघर्ष मोर्चा की कोर कमेटी के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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