दिल्ली की जेलों से गैंग नेटवर्क पर लगेगा ब्रेक, हाई-रिस्क गैंगस्टरों को दूसरे राज्यों में भेजने की तैयारी
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (23 August 2026): दिल्ली में संगठित अपराध और जेलों के भीतर से संचालित होने वाले आपराधिक नेटवर्क पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। दिल्ली सरकार ने राजधानी की जेलों में बंद विचाराधीन गैंगस्टरों, संगठित अपराधियों और अन्य हाई-रिस्क कैदियों को जरूरत पड़ने पर दूसरे राज्यों की जेलों में ट्रांसफर करने के लिए ‘ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स (पंजाब अमेंडमेंट) एक्ट, 2025’ को दिल्ली में लागू करने का प्रस्ताव रखा है। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से जेलों की सुरक्षा मजबूत होगी और जेल के अंदर से गैंग चलाने की गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
सरकार के मुताबिक, दिल्ली की जेलों में कई ऐसे कुख्यात अपराधी बंद हैं, जो अभी विचाराधीन कैदी हैं और उनके खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं। मौजूदा व्यवस्था में दोषी कैदियों को दूसरे राज्य की जेल में भेजने का प्रावधान है, लेकिन विचाराधीन कैदियों के अंतरराज्यीय ट्रांसफर के लिए स्पष्ट और प्रभावी कानूनी व्यवस्था सीमित है। सरकार का दावा है कि इसी स्थिति का फायदा उठाकर कुछ हाई-रिस्क कैदी जेल के भीतर रहते हुए भी अपने स्थानीय आपराधिक नेटवर्क से संपर्क बनाए रखने और गतिविधियों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं।
दिल्ली सरकार के अनुसार, मई 2026 में राजधानी में 26 चिन्हित गिरोहों के 188 सदस्यों की पहचान की गई थी, जिनमें से 107 गैंगस्टरों को गिरफ्तार किया गया। सरकार को आशंका है कि जेलों में लंबे समय तक एक ही जगह रहने वाले हाई-रिस्क अपराधियों के बीच गैंग प्रतिद्वंद्विता, धमकी, रंगदारी, लक्षित हत्या और आपराधिक साजिश जैसी गतिविधियों का खतरा बना रह सकता है। ऐसे कैदियों को दिल्ली से बाहर की जेलों में स्थानांतरित करने से उनके स्थानीय नेटवर्क और सहयोगियों से संपर्क कमजोर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत किसी विचाराधीन गैंगस्टर या हाई-रिस्क कैदी को दूसरे राज्य की जेल में भेजने का फैसला सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और जनहित जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर किया जाएगा। इसके लिए संबंधित राज्यों की आपसी सहमति या केंद्रीय गृह मंत्रालय की स्वीकृति की जरूरत हो सकती है। यानी हर विचाराधीन कैदी को स्वतः दूसरे राज्य में नहीं भेजा जाएगा। जहां आवश्यक होगा, न्यायिक प्रक्रिया भी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधानों के अनुसार आगे बढ़ाई जाएगी।
दिल्ली सरकार जिस कानून को लागू करने की तैयारी कर रही है, उसमें पंजाब मॉडल को आधार बनाया गया है। पंजाब ने ‘ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स (पंजाब अमेंडमेंट) एक्ट, 2025’ में संशोधन किया था और इसे 21 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी। इसके तहत सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और जनहित को ध्यान में रखते हुए विचाराधीन कैदियों को भी एक राज्य से दूसरे राज्य की जेल में स्थानांतरित करने का प्रावधान किया गया। इसके अलावा केंद्र के ‘मॉडल प्रिजन एंड करेक्शनल सर्विसेज एक्ट, 2023’ में भी कुछ परिस्थितियों में राज्यों की आपसी सहमति और संबंधित ट्रायल कोर्ट की सहमति के आधार पर अंतरराज्यीय कैदी ट्रांसफर की व्यवस्था का उल्लेख है।
दिल्ली सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था के लागू होने से हाई-रिस्क कैदियों का प्रबंधन अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा। सरकार के मुताबिक, इससे जेलों में गैंगवार और आपराधिक गतिविधियों को नियंत्रित करने, गैंगस्टरों के स्थानीय नेटवर्क को कमजोर करने और गवाहों को प्रभावित करने जैसी संभावित कोशिशों पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है। साथ ही, संगठित अपराध के खिलाफ दिल्ली और दूसरे राज्यों की पुलिस एवं जेल प्रशासन के बीच समन्वय मजबूत होने की उम्मीद है।
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