ग्रीन टेक्नोलॉजी से AI तक: ITS इंजीनियरिंग कॉलेज में 5 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय FDP संपन्न

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (23/08/2026): आई.टी.एस. इंजीनियरिंग कॉलेज, ग्रेटर नोएडा के डिपार्टमेंट ऑफ एप्लाइड साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज की ओर से “Green Technologies and Intelligent Systems for a Sustainable Future” विषय पर आयोजित पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। ऑनलाइन आयोजित इस कार्यक्रम में भारत सहित विभिन्न देशों के विश्वविद्यालयों एवं प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया।

FDP के दौरान ग्रीन टेक्नोलॉजी, सतत विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, नैनोमटेरियल्स, नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत सामग्री, ऊर्जा भंडारण, सॉफ्टवेयर विश्वसनीयता और इंटेलिजेंट सिस्टम्स जैसे समकालीन विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार और शोध अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का उद्देश्य फैकल्टी सदस्यों एवं शोधकर्ताओं को उभरती तकनीकों से परिचित कराना और सतत भविष्य के निर्माण में तकनीकी नवाचार की भूमिका को समझना रहा।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र का संचालन FDP के संयोजक डॉ. पी. सी. झा और डॉ. सचिन कुमार ने किया। उन्होंने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों, विषय-वस्तु और पांच दिवसीय अकादमिक रूपरेखा की जानकारी दी। उद्घाटन अवसर पर प्रो. (डॉ.) मयंक गर्ग, निदेशक, आई.टी.एस. इंजीनियरिंग कॉलेज; डॉ. विष्णु शर्मा, डीन एकेडमिक्स; तथा प्रो. (डॉ.) ओ. पी. चौधरी, प्रमुख, डिपार्टमेंट ऑफ एप्लाइड साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज उपस्थित रहे। वक्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संकट और तेजी से बदलती तकनीकी परिस्थितियों जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान अंतरविषयी अनुसंधान, नवाचार और पर्यावरण-अनुकूल प्रौद्योगिकियों के माध्यम से ही संभव है।

क्वांटम कंप्यूटिंग और मैग्नेटिक मेमोरी पर चर्चा

FDP के पहले दिन डॉ. अमित अग्रवाल, एसोसिएट प्रोफेसर एवं असिस्टेंट डीन, आईआईएलएम यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा ने “Quantum Computing: An Emerging Paradigm in Technology” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने क्वांटम कंप्यूटिंग की मूलभूत अवधारणाओं को समझाते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, वैज्ञानिक अनुसंधान और जटिल समस्याओं के समाधान में इसकी संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

इसके बाद डॉ. हिमानी खंडूरी, एसोसिएट प्रोफेसर, आई.टी.एस. इंजीनियरिंग कॉलेज ने “Importance of Perpendicular Magnetic Anisotropy in Magnetic Memory” विषय पर तकनीकी सत्र लिया। उन्होंने अगली पीढ़ी की मैग्नेटिक मेमोरी तकनीक में परपेंडिकुलर मैग्नेटिक एनीसोट्रॉपी की उपयोगिता तथा उच्च स्टोरेज क्षमता, ऊर्जा दक्षता और बेहतर डिवाइस परफॉर्मेंस में इसकी भूमिका पर चर्चा की।

ग्रीन केमिस्ट्री से सर्कुलर इकोनॉमी तक

कार्यक्रम के दूसरे दिन सतत रसायन विज्ञान, सर्कुलर इकोनॉमी और नैनो टेक्नोलॉजी पर केंद्रित सत्र आयोजित किए गए। प्रो. (डॉ.) बी. एल. आहूजा, कुलपति, बोडोलैंड यूनिवर्सिटी, असम ने “DFT Strategies in Green Chemistry and Validation” विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया कि कम्प्यूटेशनल केमिस्ट्री का इस्तेमाल पर्यावरण-अनुकूल रासायनिक प्रक्रियाओं के विकास और उनके वैज्ञानिक सत्यापन में किस प्रकार किया जा सकता है।

इसके बाद प्रो. (डॉ.) अरुण अरोड़ा, डीन, लॉयड बिजनेस स्कूल, ग्रेटर नोएडा ने “Circular Economy and Waste to Wealth Approaches in the Era of AI” विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने एआई आधारित तकनीकों के माध्यम से कचरे के बेहतर प्रबंधन, संसाधनों के पुनः उपयोग और वेस्ट को वैल्यू में बदलने की संभावनाओं को रेखांकित किया।

दिन के अंतिम तकनीकी सत्र में डॉ. अभिषेक भारद्वाज, असिस्टेंट प्रोफेसर, एमिटी यूनिवर्सिटी, ग्वालियर ने “Role of Nanomaterials for Sustainable Technologies” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने नैनोमटेरियल्स के जरिए नवीकरणीय ऊर्जा, प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरणीय उपचार और जल शुद्धिकरण जैसे क्षेत्रों में विकसित हो रही तकनीकों की जानकारी दी।

इंटेलिजेंट ऑप्टिमाइजेशन और क्वांटम मैग्नेटोमेट्री पर विशेषज्ञ व्याख्यान

तीसरे दिन डॉ. प्रियंका अग्रवाल, असिस्टेंट प्रोफेसर, एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, गाजियाबाद ने “Software Reliability Prediction Using Intelligent Optimization Techniques for Sustainable Computing Systems” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने इंटेलिजेंट ऑप्टिमाइजेशन तकनीकों की मदद से सॉफ्टवेयर की विश्वसनीयता बढ़ाने और अधिक प्रभावी एवं टिकाऊ कंप्यूटिंग सिस्टम विकसित करने की संभावनाओं को समझाया।

इसके बाद चिली के सैंटियागो स्थित Universidad Mayor के Centro de Multidisciplinario Fisica से जुड़े डॉ. मोहन सी. माथपाल ने “Defects in Nano-dimensional Materials for Quantum Magnetometry Applications” विषय पर अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सत्र लिया। उन्होंने नैनो-आयामी सामग्रियों में मौजूद दोषों के क्वांटम सेंसिंग एवं क्वांटम मैग्नेटोमेट्री पर प्रभाव तथा इनके वैज्ञानिक अनुप्रयोगों पर विस्तार से चर्चा की।

उन्नत सामग्री और हरित नवाचार पर जोर

चौथे दिन उन्नत सामग्री विज्ञान और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों पर केंद्रित सत्र आयोजित हुए। डॉ. पी. सी. झा, डिपार्टमेंट ऑफ एप्लाइड साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज, आई.टी.एस. इंजीनियरिंग कॉलेज ने “Shellac Based Biodegradable Insulating Varnishes” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने शेलैक आधारित बायोडिग्रेडेबल इंसुलेटिंग वार्निश को पारंपरिक सिंथेटिक वार्निश के टिकाऊ विकल्प के रूप में प्रस्तुत करते हुए इसके पर्यावरणीय और सुरक्षात्मक गुणों की जानकारी दी।

अंतरराष्ट्रीय सत्र में मलेशिया की Universiti Pertahanan Nasional Malaysia के Centre for Defence Foundation Studies की डॉ. अज़ुरैदा अमात ने “Advanced Functional Glasses for Sustainable Radiation Shielding: Enabling Green Technologies through Materials Innovation” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने उन्नत कार्यात्मक ग्लास के जरिए स्वास्थ्य, रक्षा और औद्योगिक क्षेत्रों में अधिक पर्यावरण-अनुकूल रेडिएशन शील्डिंग विकसित करने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

ऊर्जा भंडारण और MXene तकनीक पर अंतिम दिन चर्चा

FDP के अंतिम दिन डॉ. अरविंद सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ मैटेरियल्स साइंस एंड मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग, आईआईटी भिलाई ने “A Road Map Towards a Sustainable Future: Energy Storage Technologies” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बैटरी, सुपरकैपेसिटर और आधुनिक ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में हो रहे तकनीकी विकास की जानकारी देते हुए स्वच्छ ऊर्जा के प्रभावी उपयोग के लिए ऊर्जा भंडारण तकनीकों को महत्वपूर्ण बताया।

इसके बाद डॉ. सचिन कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ एप्लाइड साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज, आई.टी.एस. इंजीनियरिंग कॉलेज ने “MXene: From Fundamental Science to Real-World Energy Applications” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने MXene की विशेषताओं और इसके सुपरकैपेसिटर, बैटरी, फ्यूल सेल तथा इलेक्ट्रोमैग्नेटिक शील्डिंग जैसे क्षेत्रों में संभावित उपयोगों पर चर्चा की।

अंतिम तकनीकी सत्र में डॉ. राकेश कुमार मीना, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ मैथेमेटिक्स, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली ने “Queueing Modelling and Performance Analysis of M/G/1 Repairable Fault-Tolerant System with F-policy, Server Breakdown, and Vacation” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। उन्होंने क्यूइंग थ्योरी और गणितीय मॉडलिंग के माध्यम से जटिल एवं फॉल्ट-टॉलरेंट इंजीनियरिंग प्रणालियों की कार्यक्षमता, विश्वसनीयता और प्रदर्शन का विश्लेषण करने की तकनीकों पर जानकारी दी।

प्रश्नोत्तर सत्रों में हुआ अकादमिक संवाद

FDP के प्रत्येक तकनीकी सत्र के बाद प्रश्नोत्तर का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रतिभागियों ने विशेषज्ञ वक्ताओं से विभिन्न शोध एवं तकनीकी विषयों पर सवाल किए और अपने अनुभव साझा किए। देश-विदेश के विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और अन्य अकादमिक संगठनों से जुड़े शिक्षकों, शोधकर्ताओं, विद्वानों और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की।

पांच दिवसीय कार्यक्रम का समापन वैलेडिक्टरी सत्र के साथ हुआ। इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की और आयोजन समिति को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अकादमिक कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए बधाई दी। वक्ताओं ने कहा कि निरंतर फैकल्टी डेवलपमेंट, अंतरविषयी शोध और वैश्विक अकादमिक सहयोग उच्च शिक्षा में नवाचार एवं उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक हैं।

प्रतिभागियों ने भी FDP को ज्ञानवर्धक और उपयोगी बताते हुए विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद तथा नवीनतम शोध क्षेत्रों को समझने के अवसर की सराहना की। समापन अवसर पर औपचारिक वोट ऑफ थैंक्स प्रस्तुत करते हुए सभी विशेषज्ञ वक्ताओं, कॉलेज प्रबंधन, आयोजन समिति, फैकल्टी समन्वयकों, प्रतिभागियों और कार्यक्रम की सफलता में सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

इस अंतरराष्ट्रीय FDP के सफल आयोजन के साथ आई.टी.एस. इंजीनियरिंग कॉलेज ने शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, सतत विकास और वैश्विक अकादमिक सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत किया। डिपार्टमेंट ऑफ एप्लाइड साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज की यह पहल फैकल्टी सदस्यों एवं शोधकर्ताओं के निरंतर व्यावसायिक विकास के साथ-साथ उभरती तकनीकों पर ज्ञान के आदान-प्रदान और अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।


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