खान मार्केट एसोसिएशन को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, प्रॉपर्टी टैक्स की पद्धति तय करने से इनकार
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (21 August 2026): दिल्ली हाईकोर्ट ने खान मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) को संपत्तियों का मूल्यांकन योग्य मूल्य तय करने के लिए एक समान पद्धति तैयार कर उसे लागू करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। एसोसिएशन की ओर से संपत्ति कर के आकलन में एकरूपता लाने की मांग की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल कर किसी वैधानिक प्राधिकरण को संपत्तियों के मूल्यांकन या संपत्ति कर निर्धारण के लिए कोई खास पद्धति अपनाने का निर्देश नहीं दे सकती।
जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस शैल जैन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि संपत्तियों का मूल्यांकन योग्य मूल्य निर्धारित करने की प्रक्रिया संबंधित वैधानिक और प्रशासनिक प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आती है। अदालत ने कहा कि जब तक सक्षम प्राधिकरण कानून में निर्धारित ढांचे के भीतर काम कर रहा है, तब तक उसकी प्रशासनिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर अदालत अपनी पसंद की कोई दूसरी पद्धति लागू नहीं कर सकती।
खान मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि समान परिस्थितियों वाली संपत्तियों के बावजूद NDMC द्वारा अलग-अलग तरीके से मूल्यांकन योग्य मूल्य तय किया जा रहा है। एसोसिएशन का कहना था कि इससे संपत्ति कर के आकलन में असमानता पैदा हो रही है। याचिका में मांग की गई थी कि जब तक यूनिट एरिया पद्धति लागू नहीं होती, तब तक सभी संबंधित संपत्तियों के मूल्यांकन योग्य मूल्य तय करने के लिए एक समान तरीका अपनाया जाए।
फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अदालत की शक्तियों की सीमाओं का भी उल्लेख किया। पीठ ने कहा कि परमादेश का उद्देश्य किसी व्यक्ति के कानूनी अधिकार के अनुरूप वैधानिक या सार्वजनिक कर्तव्य का पालन सुनिश्चित करना है। इसका इस्तेमाल अदालत द्वारा किसी वैधानिक प्राधिकरण का काम अपने हाथ में लेने या यह तय करने के लिए नहीं किया जा सकता कि कोई प्रशासनिक प्राधिकरण अपना काम किस विशेष तरीके से पूरा करे।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मूल्यांकन योग्य मूल्य निर्धारित करने की पद्धति तय करना NDMC जैसे सक्षम प्राधिकरण के वैधानिक और प्रशासनिक कार्यों का हिस्सा है। ऐसे मामलों में अदालत तब तक अपनी पद्धति प्राधिकरण पर लागू नहीं कर सकती, जब तक यह साबित न हो कि प्राधिकरण वैधानिक ढांचे से बाहर जाकर काम कर रहा है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद खान मार्केट में संपत्ति कर के मूल्यांकन से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर NDMC की मौजूदा व्यवस्था फिलहाल बरकरार रहेगी।
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