MSME संशोधन से कारोबारियों को बड़ी राहत की उम्मीद, IEA ने बताया आगे क्या जरूरी

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (11/08/2026): एमएसएमई सेक्टर में हालिया संशोधनों को लेकर कारोबारियों और उद्यमियों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि भुगतान में देरी की समस्या से जूझ रहे छोटे और मध्यम उद्योगों को नए प्रावधानों से राहत मिल सकती है। टेन न्यूज नेटवर्क से बातचीत में इंडस्ट्रियल एंटरप्रेन्योर एसोसिएशन (IEA) के प्रेसिडेंट संजीव शर्मा ने कहा कि करीब 20 साल पुराने एमएसएमई कानून में किए गए संशोधन कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। खासतौर पर समयबद्ध भुगतान और विवादों के निस्तारण के लिए निर्धारित समय-सीमा को उन्होंने स्वागत योग्य कदम बताया।

संजीव शर्मा ने कहा कि एमएसएमई के सामने सबसे बड़ी समस्याओं में से एक समय पर भुगतान नहीं मिलना है। उन्होंने बताया कि संशोधन में भुगतान से जुड़े विवादों को निर्धारित समय-सीमा में निपटाने पर जोर दिया गया है। उनके मुताबिक, 30 और 90 दिन की समय-सीमा तय किए जाने से उद्यमियों को लंबे समय तक भुगतान अटके रहने की समस्या से राहत मिल सकती है। उन्होंने कहा कि किसी भी कंपनी या फर्म के लिए फंड की कमी कारोबार को प्रभावित करती है, जबकि समय पर भुगतान मिलने से उद्योगों के विस्तार और संचालन में मदद मिलती है।

IEA के संस्थापक अध्यक्ष ने संशोधन का स्वागत करते हुए कहा कि समय पर भुगतान मिलने से उद्योगों को बैंक से कर्ज लेने की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि, उन्होंने सरकार के सामने एमएसएमई से जुड़ी कुछ अन्य समस्याएं भी उठाईं। उन्होंने एमएसएमई के लिए औद्योगिक भूखंडों के आवंटन की प्रक्रिया और पैकेजिंग उद्योग में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़ी समस्या पर चिंता जताई।

उनका कहना है कि कच्चा माल 18 प्रतिशत जीएसटी पर खरीदने और तैयार उत्पाद 5 प्रतिशत जीएसटी पर बेचने के कारण 13 प्रतिशत का अंतर आईटीसी के रूप में फंस जाता है। उनका दावा है कि यदि इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में कई छोटी पैकेजिंग इकाइयों के सामने आर्थिक संकट गहरा सकता है।

संजीव शर्मा ने एमएसएमई के लिए TReDS (Trade Receivables Discounting System) को भी उपयोगी प्लेटफॉर्म बताया। उन्होंने कहा कि इसके जरिए एमएसएमई अपने इनवॉइस को डिस्काउंट कराकर समय से पहले भुगतान प्राप्त कर सकते हैं और विभिन्न बैंकों की ब्याज दरों के आधार पर विकल्प चुन सकते हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि बड़ी औद्योगिक इकाइयों, पीएसयू और अन्य बड़ी कंपनियों के लिए TReDS पर पंजीकरण अनिवार्य किया जाए, ताकि एमएसएमई को भुगतान में देरी की समस्या से राहत मिल सके।

IEA के उपाध्यक्ष नरेन्द्र सोम, जो सूरजपुर साइट-बी में पैकेजिंग उद्योग से जुड़े हैं, ने भी संशोधन को सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि नीति बनाना महत्वपूर्ण है, लेकिन उसका प्रभावी और सुचारु क्रियान्वयन उससे भी ज्यादा जरूरी है।

उनके मुताबिक, जब छोटे उद्योगों का भुगतान फंस जाता है तो उनके लिए कच्चा माल खरीदना और रोजमर्रा के कारोबारी लेनदेन जारी रखना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में यदि सरकार भुगतान को लेकर प्रभावी व्यवस्था और सुविधा उपलब्ध कराती है, तो इसका लाभ सिर्फ उद्यमियों को ही नहीं, बल्कि पूरे औद्योगिक क्षेत्र और अर्थव्यवस्था को मिलेगा। उन्होंने कहा कि अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए प्रावधानों को जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।


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