MSME संशोधन विधेयक 2026 संसद से पास: भुगतान से लेकर विवाद निपटारे तक बदलेंगे नियम
टेन न्यूज नेटवर्क
New Delhi News (09 अगस्त 2026): सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी MSME क्षेत्र को मजबूत करने और छोटे कारोबारों के लिए कारोबार करना आसान बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को संसद की मंजूरी मिल गई है। लोकसभा ने इसे 7 अगस्त 2026 को पारित किया, जबकि इससे पहले 3 अगस्त को राज्यसभा से विधेयक को मंजूरी मिल चुकी थी।
यह संशोधन करीब 20 साल पुराने MSMED Act, 2006 में बदलाव करता है। इसका मुख्य उद्देश्य MSME के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाना, समय पर भुगतान सुनिश्चित करना, वर्किंग कैपिटल तक पहुंच आसान करना और कारोबारी विवादों का तेजी से समाधान करना है।
9.16 करोड़ MSME पंजीकृत
सरकार के मुताबिक, उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत MSME की संख्या 1 अप्रैल 2023 के 1.65 करोड़ से बढ़कर अब 9.16 करोड़ हो गई है। यह क्षेत्र 40 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है और भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
सरकार का कहना है कि तकनीकी प्रगति, डिजिटल सिस्टम और बदलते कारोबारी एवं कानूनी माहौल को देखते हुए 2006 के कानून में बदलाव जरूरी हो गया था।
MSME का रजिस्ट्रेशन रहेगा मुफ्त और स्वैच्छिक
संशोधन के तहत उद्यम पंजीकरण पोर्टल को MSME के लिए डिजिटल, मुफ्त और स्वैच्छिक पंजीकरण मंच के रूप में स्थायी दर्जा दिया गया है। यानी MSME के लिए पंजीकरण स्वैच्छिक रहेगा।
इसके साथ ही नियमों के उल्लंघन को अपराध की श्रेणी से बाहर निकालकर नागरिक दंड की क्रमिक व्यवस्था लागू की गई है। गलत जानकारी देने जैसे मामलों में पहली बार चेतावनी और उसके बाद की घटनाओं में दंड का प्रावधान किया गया है।
इससे छोटे कारोबारों पर अनावश्यक आपराधिक कार्रवाई का दबाव कम करने और Ease of Doing Business को बढ़ावा देने की कोशिश की गई है।
देरी से भुगतान पर शिकंजा, 90 दिन में मध्यस्थता
MSME के सामने सबसे बड़ी समस्याओं में से एक समय पर भुगतान नहीं मिलना है। संशोधन में इससे जुड़े विवादों के समाधान के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है।
नए प्रावधान के अनुसार, मध्यस्थता की प्रक्रिया पहली उपस्थिति की निर्धारित तारीख से 90 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी। इसके बाद मामले को आर्बिट्रेशन के लिए भेजने की प्रक्रिया के लिए 30 दिन और निर्णय देने के लिए 90 दिनों की समय-सीमा तय की गई है।
इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों को लंबे समय तक भुगतान के लिए कानूनी लड़ाई में फंसे रहने से बचाना है।
छह महीने तक अपील लंबित रही तो 50% रकम दिलाने का प्रावधान
संशोधन में MSME के हितों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। यदि किसी डिक्री, मध्यस्थता निर्णय या आदेश को रद्द करने संबंधी आवेदन छह महीने से अधिक समय तक लंबित रहता है, तो अदालतों को MSME आपूर्तिकर्ता को निर्णय की राशि का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान करने का आदेश देना होगा।
इससे लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया के बीच छोटे कारोबारों को कुछ वित्तीय राहत मिल सकेगी।
TReDS के जरिए जल्द मिल सकेगा भुगतान
MSME के कैश फ्लो को बेहतर बनाने के लिए Trade Receivables Discounting System (TReDS) को भी संशोधन में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों यानी CPSEs के लिए MSME से वस्तुओं और सेवाओं की खरीद के चालानों का निपटारा TReDS प्लेटफॉर्म के माध्यम से करने की व्यवस्था की गई है। राज्यों को भी अपने सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को TReDS के जरिए चालान निपटाने के लिए प्रोत्साहित करने का अधिकार दिया गया है।
TReDS पर चालान डिस्काउंटिंग 2022-23 में करीब 40 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 3.47 लाख करोड़ रुपये हो चुकी है। सरकार का मानना है कि TReDS के अधिक इस्तेमाल से MSME को समय पर भुगतान और अतिरिक्त नकदी प्रवाह उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
MSME विवादों का ऑनलाइन समाधान
संशोधन में Online Dispute Resolution (ODR) की व्यवस्था भी की गई है। इसके जरिए MSME से जुड़े विवादों का ऑनलाइन और कम लागत में समाधान किया जा सकेगा।
इसके अलावा, Micro and Small Enterprises Facilitation Council (MSEFC) को मजबूत किया गया है। राज्य सरकारें अब भुगतान विवादों के तेजी से निपटारे के लिए एक से अधिक MSEFC स्थापित कर सकेंगी।
बकाया राशि की वसूली भी होगी आसान
संशोधित कानून में मध्यस्थता समझौते या निर्णय के तहत देय राशि की वसूली को भी मजबूत किया गया है। कुछ मामलों में बकाया राशि को भूमि राजस्व के बकाये की तरह जिला कलेक्टर, उपायुक्त या अधिसूचित प्राधिकारी के माध्यम से वसूल किया जा सकेगा।
सरकार और MSME के बीच बेहतर समन्वय पर जोर
संशोधन में MSME क्षेत्र के लिए Development Commissioner की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बनाया गया है। इसका उद्देश्य MSME और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, योजनाओं की जानकारी छोटे कारोबारों तक पहुंचाना और सरकारी सहायता हासिल करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित कार्यालय को पर्याप्त अधिकार, कर्मचारी और संसाधन मिलते हैं या नहीं।
‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य से जोड़ा गया संशोधन
सरकार के अनुसार, MSMED Act में ये बदलाव ‘विकसित भारत @2047’ की परिकल्पना के अनुरूप हैं। सरकार का लक्ष्य MSME क्षेत्र में विश्वास आधारित नियमन को बढ़ावा देना, कारोबार को औपचारिक रूप देना, रोजगार के अवसर बढ़ाना और छोटे उद्यमों को बड़े स्तर पर विस्तार करने में सक्षम बनाना है।
कुल मिलाकर, MSME संशोधन विधेयक 2026 के जरिए सरकार ने छोटे कारोबारों के लिए तीन प्रमुख मोर्चों, आसान पंजीकरण, समय पर भुगतान और तेज विवाद समाधान पर व्यवस्था को बदलने की कोशिश की है। अब इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इन नए प्रावधानों को जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।।
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