E20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित, वैज्ञानिक परीक्षण और व्यापक परामर्श के बाद लागू किया गया: केंद्र सरकार

टेन न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली, 30 जुलाई 2026 : केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल के मिश्रण वाले E20 ईंधन को व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण, फील्ड ट्रायल और सभी प्रमुख हितधारकों के साथ विस्तृत परामर्श के बाद ही देशभर में लागू किया गया है। सरकार का कहना है कि अब तक के अध्ययनों और करोड़ों वाहनों के वास्तविक उपयोग के अनुभव में E20 ईंधन से इंजन को किसी प्रकार की असामान्य क्षति या प्रदर्शन में गिरावट का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला है।

लोकसभा में एक लिखित उत्तर में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम को नीति आयोग, ऑटोमोबाइल निर्माताओं, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (IIP), तेल विपणन कंपनियों तथा अन्य तकनीकी संस्थानों के सहयोग से चरणबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से लागू किया गया।

मंत्री ने कहा कि ई20 ईंधन को लागू करने से पहले इंजन की मजबूती, स्टार्टिंग क्षमता, चालन, जंग प्रतिरोध, सामग्री की अनुकूलता, उत्सर्जन और ईंधन दक्षता जैसे सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर व्यापक प्रयोगशाला परीक्षण और फील्ड अध्ययन किए गए। इन परीक्षणों में यह पुष्टि हुई कि निर्धारित मानकों के तहत ई20 ईंधन का उपयोग पूरी तरह सुरक्षित है।

सरकार के अनुसार, देश में प्रतिदिन लगभग 8 करोड़ वाहनों में पेट्रोल भरवाया जाता है, जिनमें अधिकांश पेट्रोल वाहन हैं। पिछले साढ़े तीन वर्षों से ई15+ और ढाई वर्षों से ई19-ई20 मिश्रित पेट्रोल का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। वर्तमान में दो करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और तीन करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें इन मिश्रित ईंधनों पर चल रही हैं, लेकिन इंजन खराब होने या वाहन को नुकसान पहुंचने का कोई स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है।

लिखित उत्तर में यह भी बताया गया कि एक प्रमुख वाहन निर्माता ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें लगभग 1.5 करोड़ वाहन ऐसे थे जिन्हें मूल रूप से ई20 संगत प्रमाणित नहीं किया गया था। इसके बावजूद सर्विस रिकॉर्ड में ई20 के कारण जंग, असामान्य घिसाव या पुर्जों की आयु कम होने जैसी कोई समस्या दर्ज नहीं हुई। इसी प्रकार एक प्रमुख दोपहिया निर्माता और एक अन्य वाहन निर्माता के 1.40 करोड़ ई20-चालित वाहनों के सर्वेक्षण में भी इथेनॉल से जंग लगने का कोई प्रमाण नहीं मिला।

सरकार ने कहा कि यदि वाहन निर्माता ई20 ईंधन की सुरक्षा और अनुकूलता को लेकर आश्वस्त नहीं होते, तो वे पुराने वाहनों के लिए इसकी स्वीकृति नहीं देते और न ही संबंधित वाहनों पर वारंटी दायित्व जारी रखते।

सरकार के अनुसार, SIAM और ARAI के अध्ययन बताते हैं कि ई20 ईंधन से वाहन की त्वरण क्षमता और ड्राइविंग गुणवत्ता में सुधार होता है, जबकि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आती है। आधुनिक उच्च संपीड़न (High Compression) इंजनों के लिए एथेनॉल का उच्च ऑक्टेन स्तर अधिक उपयुक्त माना जाता है, जिससे दहन क्षमता बेहतर होती है।

केंद्र सरकार ने दोहराया कि ई20 ईंधन का कार्यान्वयन पूरी तरह वैज्ञानिक मूल्यांकन, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परीक्षण और व्यापक औद्योगिक परामर्श के बाद ही किया गया है। इससे ईंधन सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।



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