CJP Protest: क्या RSS, राष्ट्रीय बीजेपी, दिल्ली बीजेपी, BJYM और ABVP की आंखों पर पट्टी, कान में रूई और मुंह पर ताला था?

गजानन माली

टेन न्यूज नेटवर्क

दिल्ली में हुए CJP Protest ने केवल सरकार की नीतियों पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि उन संगठनों की भूमिका पर भी बहस छेड़ दी जो स्वयं को राष्ट्रवादी विचारधारा, छात्र हितों और युवाओं की आवाज़ का प्रतिनिधि मानते हैं। आंदोलन के दौरान विपक्षी दलों और विभिन्न छात्र संगठनों की सक्रियता स्पष्ट दिखाई दी, लेकिन RSS, भारतीय जनता पार्टी, दिल्ली बीजेपी, भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की सार्वजनिक सक्रियता अपेक्षाकृत कम दिखाई दी। यही कारण है कि अब यह सवाल उठ रहा है—क्या इन संगठनों की आंखों पर पट्टी, कान में रूई और मुंह पर ताला था?

यदि किसी परीक्षा में पेपर लीक के आरोप लगते हैं, भर्ती प्रक्रियाओं पर प्रश्न उठते हैं या युवाओं में रोजगार को लेकर असंतोष दिखाई देता है, तो केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष से जुड़े संगठन भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी भूमिका निभा सकते हैं। वे सरकार को ज्ञापन सौंप सकते थे, पारदर्शी जांच की मांग कर सकते थे, छात्रों के साथ संवाद स्थापित कर सकते थे तथा सेमिनार, कॉन्फ्रेंस, परिचर्चाएं और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित कर युवाओं की चिंताओं को सरकार तक पहुंचा सकते थे।

लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक या सामाजिक संगठन की ताकत केवल चुनाव जीतने से नहीं मापी जाती, बल्कि इस बात से भी आंकी जाती है कि वह जनता की वास्तविक समस्याओं को कितनी गंभीरता से उठाता है। यदि किसी बड़े छात्र आंदोलन के दौरान संगठन पूरी तरह शांत दिखाई दें, तो स्वाभाविक रूप से उनकी प्रभावशीलता और जमीनी सक्रियता पर प्रश्न उठते हैं।

इसी संदर्भ में RSS के व्यापक संगठनात्मक नेटवर्क को लेकर भी चर्चा हो रही है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे अवसरों पर संवाद, जनजागरण और सकारात्मक हस्तक्षेप के माध्यम से तनाव कम करने तथा सरकार तक रचनात्मक सुझाव पहुंचाने का प्रयास किया जा सकता था। वहीं, यह भी तथ्य है कि RSS हर राजनीतिक या छात्र आंदोलन में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं करता। इसलिए इस विषय पर अलग-अलग दृष्टिकोण संभव हैं।

आंदोलन के दौरान यदि कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा आपत्तिजनक भाषा या उग्र व्यवहार किया गया, तो उसकी आलोचना होना स्वाभाविक है। लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी आंदोलन का जवाब केवल विरोध या समर्थन से नहीं, बल्कि संवाद, संवेदनशीलता और समाधान की राजनीति से दिया जाना चाहिए।

सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े इन संगठनों ने इस अवसर को संवाद और नेतृत्व का अवसर माना, या फिर उन्होंने चुप्पी को ही अपनी रणनीति बना लिया?

यदि संगठन केवल चुनावी समय पर सक्रिय दिखाई दें और युवाओं के कठिन प्रश्नों पर मौन रहें, तो यह मौन स्वयं एक राजनीतिक संदेश बन जाता है। CJP Protest ने शायद यही बहस शुरू की है कि क्या भारत के बड़े वैचारिक और राजनीतिक संगठनों को अब अपनी जमीनी भूमिका और जनसंवाद की शैली पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है?

SEO Keywords: CJP Protest, RSS, BJP, Delhi BJP, ABVP, BJYM, Student Protest Delhi, Paper Leak, Youth Protest, Student Politics, Opinion, Google Discover, Delhi News, Political Analysis, Student Movement.


Discover more from टेन न्यूज हिंदी

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

टिप्पणियाँ बंद हैं।