दिल्ली में फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट की नई व्यवस्था, कितनी होगी फीस

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (17 July 2026): राजधानी में फायर सेफ्टी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब इमारतों और व्यावसायिक परिसरों के लिए फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (एफएससी) जारी करने की प्रक्रिया में थर्ड-पार्टी फायर सेफ्टी ऑडिटर्स की भी भागीदारी होगी। दिल्ली अग्निशमन विभाग ने योग्य और अनुभवी ऑडिटर्स के पंजीकरण तथा पैनल में शामिल करने के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। सरकार का मानना है कि इससे प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया तेज होगी और फायर सेफ्टी मानकों का बेहतर पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

अब तक फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट केवल दिल्ली अग्निशमन विभाग ही जारी करता था, लेकिन हाल के महीनों में राजधानी में हुई कई बड़ी आग की घटनाओं, खासकर हौज रानी स्थित होटल अग्निकांड में 22 लोगों की मौत के बाद व्यवस्था में बदलाव का निर्णय लिया गया। पिछले महीने अधिसूचित संशोधित नियमों के तहत अब योग्य फायर सेफ्टी ऑडिटर्स को अधिकृत किया जाएगा। विभाग के अनुसार यह कदम भवनों की नियमित जांच और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

नए नियमों के अनुसार ऑडिटर्स को योग्यता और अनुभव के आधार पर एल-1, एल-2 और एल-3 श्रेणियों में पंजीकृत किया जाएगा। बीई या बीटेक (फायर सेफ्टी), नेशनल फायर सर्विस कॉलेज, नागपुर का सब-ऑफिसर कोर्स, सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स या आर्किटेक्चर में डिग्री तथा फायर एंड लाइफ सेफ्टी ऑडिट में पीजी डिप्लोमा जैसी योग्यताएं निर्धारित की गई हैं। इसके साथ संबंधित क्षेत्र में एक से दस वर्ष तक का अनुभव भी अनिवार्य होगा। पंजीकरण तीन वर्ष के लिए मान्य रहेगा और इसके लिए एल-1, एल-2 तथा एल-3 श्रेणियों के अनुसार क्रमशः 10 हजार, 20 हजार और 30 हजार रुपये का पंजीकरण शुल्क तय किया गया है।

व्यवस्था के तहत एल-1 और एल-2 श्रेणी के ऑडिटर 15 मीटर तक ऊंचाई वाली इमारतों का निरीक्षण कर फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी कर सकेंगे, जबकि एल-3 श्रेणी के ऑडिटर सभी प्रकार की इमारतों और परिसरों का निरीक्षण करने के लिए अधिकृत होंगे। भवन मालिक या कब्जाधारी दिल्ली अग्निशमन विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध पैनल से ऑडिटर का चयन करेगा। निरीक्षण के बाद ऑडिटर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगा और सभी मानकों के अनुरूप पाए जाने पर फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करेगा।

ऑडिटर्स अपनी सेवाओं के लिए भवन मालिकों से निर्धारित शुल्क भी ले सकेंगे। एल-1 श्रेणी के लिए शुल्क 10 हजार से 50 हजार रुपये, एल-2 के लिए 35 हजार से 90 हजार रुपये और एल-3 के लिए 63 हजार रुपये से लेकर अधिकतम पांच लाख रुपये तक तय किया गया है। शुल्क भवन की ऊंचाई, निर्मित क्षेत्र, उपयोग और फायर सेफ्टी सिस्टम की जटिलता के आधार पर निर्धारित होगा। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से फायर सेफ्टी प्रमाणन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, पेशेवर और प्रभावी बनेगी, जिससे भविष्य में आग जैसी घटनाओं के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी।


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