शारदा यूनिवर्सिटी में आधुनिक बायोइन्फॉर्मेटिक्स पर पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (14/07/2026): ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा यूनिवर्सिटी में आधुनिक बायोइन्फॉर्मेटिक्स और कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी के क्षेत्र में शिक्षकों, वैज्ञानिकों और शोधार्थियों की विशेषज्ञता बढ़ाने के उद्देश्य से पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों, शोध पद्धतियों और डिजिटल टूल्स से परिचित कराते हुए उन्हें अनुसंधान एवं शिक्षण के क्षेत्र में अधिक सक्षम बनाना है।

विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में देशभर के शिक्षकों, वैज्ञानिकों और पीएचडी शोधार्थियों को आधुनिक बायोइन्फॉर्मेटिक्स के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम के दौरान केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि प्रतिभागियों को प्रायोगिक (हैंड्स-ऑन) प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा, ताकि वे सीखी गई तकनीकों का उपयोग अपने शोध कार्य और अकादमिक गतिविधियों में प्रभावी ढंग से कर सकें।

कार्यक्रम के पाठ्यक्रम में डीएनए एवं प्रोटीन सीक्वेंस विश्लेषण, प्रोटीन संरचना (प्रोटीन स्ट्रक्चर), मॉलेक्यूलर डॉकिंग, कंप्यूटर आधारित दवा खोज (कंप्यूटर एडेड ड्रग डिस्कवरी), ओमिक्स टेक्नोलॉजी, सिस्टम्स बायोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तथा मशीन लर्निंग जैसे समकालीन और अत्याधुनिक विषयों को शामिल किया गया है। विशेषज्ञ इन विषयों पर व्याख्यान देने के साथ-साथ आधुनिक सॉफ्टवेयर और रिसर्च टूल्स के उपयोग का प्रशिक्षण भी देंगे।

शारदा यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) सिबाराम खारा ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच शिक्षकों और शोधकर्ताओं का नवीनतम तकनीकों से अपडेट रहना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान करते हैं, जिससे उनकी अनुसंधान क्षमता और अकादमिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह कार्यक्रम प्रतिभागियों को भविष्य के शोध कार्यों के लिए नई सोच और बेहतर दृष्टिकोण प्रदान करेगा।

वहीं, शारदा यूनिवर्सिटी के डीन रिसर्च प्रो. डॉ. भुवनेश कुमार ने कहा कि बायोइन्फॉर्मेटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग ने जीवन विज्ञान (लाइफ साइंस) के शोध की दिशा और कार्यशैली में बड़ा परिवर्तन किया है। उन्होंने बताया कि इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के माध्यम से प्रतिभागियों को अत्याधुनिक रिसर्च टूल्स और तकनीकों पर कार्य करने का अवसर मिलेगा, जिससे वे अपने शिक्षण और अनुसंधान कार्यों में इनका प्रभावी उपयोग कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम ज्ञान के आदान-प्रदान, नवाचार को बढ़ावा देने और नए शैक्षणिक एवं शोध सहयोग विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।

विश्वविद्यालय का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे तथा प्रतिभागियों को वैश्विक स्तर पर विकसित हो रही नई तकनीकों के अनुरूप अपने कौशल को मजबूत करने का अवसर प्रदान करेंगे।


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