नोएडा भूमि मुआवजा घोटाले की जांच अब विजिलेंस के हवाले, सुप्रीम कोर्ट सख्त; 3 महीने में मांगी रिपोर्ट

टेन न्यूज नेटवर्क

Noida News (14/07/2026): नोएडा में भूमि अधिग्रहण मुआवजा वितरण में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने अब तक जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को इस जिम्मेदारी से मुक्त करते हुए पूरे मामले की जांच उत्तर प्रदेश स्टेट विजिलेंस ब्यूरो को सौंप दी है। साथ ही विजिलेंस को निर्देश दिया गया है कि वह तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करे।

सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की। यह मामला नोएडा प्राधिकरण के एक विधि अधिकारी समेत कुछ अधिकारियों और भू-स्वामियों को नियमों के विपरीत निर्धारित सीमा से अधिक मुआवजा दिए जाने के आरोपों से जुड़ा है। जांच के दौरान अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की कथित मिलीभगत के आरोप भी सामने आए हैं।

सुनवाई के दौरान एसआईटी ने अपनी अंतिम स्थिति रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की। रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में अब तक छह एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें से तीन मुकदमे कथित भ्रष्टाचार और अधिकारियों की मिलीभगत से जुड़े हैं, जबकि तीन अन्य मामले आय से अधिक संपत्ति के आरोपों के आधार पर दर्ज किए गए हैं। जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि कुछ अधिकारियों ने किसानों का मुआवजा बढ़वाने के नाम पर अवैध रूप से धन की वसूली की।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद आगे की जांच स्टेट विजिलेंस ब्यूरो से कराई जाना उचित होगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को निर्देश दिया कि वह जांच से संबंधित सभी दस्तावेज, साक्ष्य और रिकॉर्ड तत्काल विजिलेंस को सौंपे, ताकि जांच बिना किसी विलंब के आगे बढ़ सके। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच या उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई में अनावश्यक देरी होती है, तो प्रभावित पक्ष या कोई भी व्यक्ति जनहित में हाईकोर्ट अथवा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) से जुड़े अपने पुराने आदेश पर भी स्थिति स्पष्ट की। अदालत ने कहा कि बिना पर्यावरण मंजूरी वाली परियोजनाओं पर रोक का आदेश केवल उन्हीं मामलों में लागू होगा, जहां कानून के तहत ईआईए की स्वीकृति अनिवार्य है। इसके साथ ही अदालत ने किसानों को पहले से मिली गिरफ्तारी से अंतरिम राहत को फिलहाल जारी रखने का भी आदेश दिया है।


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