मनमाने हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से दो सप्ताह में मांगे नए नियम
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (13 July 2026): हवाई यात्रियों को राहत देने और विमान किराए में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने केंद्र से भारतीय विमानन अधिनियम, 2024 के तहत तैयार किए गए नियम दोसप्ताह के भीतर अदालत के समक्ष पेश करने को कहा है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने निर्देश दिया कि नियमों को सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत किया जाए, चाहे वे संसद में पेश किए गए हों या नहीं। यह आदेश नागरिक विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्रियों के हितों की सुरक्षा से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन ने दायर की है, जिसमें निजी एयरलाइंस द्वारा हवाई किराए में होने वाले अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव, अतिरिक्त शुल्क और यात्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर स्वतंत्र एवं प्रभावी नियामक व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्तमान व्यवस्था में एयरलाइंस मनमाने तरीके से किराए तय करती हैं और कई बार छिपे हुए शुल्क लगाकर यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालती हैं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित की है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि नए नियमों का मसौदा तैयार हो चुका है और फिलहाल उनका अनुवाद किया जा रहा है। सरकार ने कहा कि नियमों को संसद के समक्ष रखना अनिवार्य है। वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि जब तक नए नियम लागू नहीं होते, तब तक पुरानी व्यवस्था ही प्रभावी रहेगी। उन्होंने हवाई किराए में लगातार हो रही अत्यधिक बढ़ोतरी पर चिंता जताते हुए कहा कि यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए एक स्वतंत्र और सशक्त नियामक तंत्र की आवश्यकता है।
सुप्रीम कोर्ट इससे पहले भी त्योहारों, आपात परिस्थितियों और अधिक मांग वाले समय में एयरलाइंस द्वारा किराए में भारी बढ़ोतरी पर चिंता जता चुका है। अदालत ने इस तरह की मूल्य वृद्धि को यात्रियों के शोषण से जोड़ते हुए केंद्र सरकार से प्रभावी समाधान तलाशने को कहा था। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि कई निजी एयरलाइंस ने बिना किसी स्पष्ट कारण के इकोनॉमी क्लास में मुफ्त चेक-इन बैगेज की सीमा 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किलोग्राम कर दी, जिससे यात्रियों पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ बढ़ा है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्तमान में ऐसा कोई प्रभावी नियामक तंत्र नहीं है जो एयरलाइंस के किराए, एल्गोरिदम आधारित मूल्य निर्धारण, रद्दीकरण नीतियों और अतिरिक्त शुल्कों की निगरानी कर सके। इससे विशेष रूप से त्योहारों और आपात स्थितियों में अंतिम समय पर यात्रा करने वाले यात्रियों को अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सभी की निगाहें केंद्र सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले नए नियमों पर हैं, जिनसे हवाई किराया निर्धारण और यात्री अधिकारों को लेकर भविष्य की व्यवस्था तय हो सकती है।
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