दिल्ली सरकार की बड़ी पहल, DSEU और MAAC मिलकर शुरू करेंगे क्रिएटिव इंडस्ट्री के डिग्री कोर्स

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (13 July 2026): दिल्ली सरकार ने कौशल आधारित उच्च शिक्षा और रचनात्मक उद्योग (क्रिएटिव इंडस्ट्री) को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली स्किल एंड एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी (DSEU) और एमईएल ट्रेनिंग एंड असेसमेंट्स लिमिटेड (MAAC की मूल कंपनी) के बीच पांच वर्षों के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी के तहत अब छात्रों को उद्योग आधारित प्रशिक्षण के साथ विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त डिग्री भी मिलेगी। सरकार का कहना है कि इससे एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, डिजाइन और अन्य रचनात्मक क्षेत्रों में युवाओं के लिए नए रोजगार और करियर के अवसर खुलेंगे।

शिक्षा, उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCrF) के अनुरूप युवाओं को वैश्विक स्तर की शिक्षा और कौशल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य दिल्ली को देश की उभरती हुई “ऑरेंज इकोनॉमी” यानी रचनात्मक और सांस्कृतिक उद्योग का प्रमुख केंद्र बनाना है। इस मॉडल में MAAC उद्योग की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करेगा और प्लेसमेंट की जिम्मेदारी निभाएगा, जबकि DSEU डिग्री, परीक्षा और शैक्षणिक संचालन की जिम्मेदारी संभालेगा।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री ने तीन नई पहलों की भी घोषणा की। पहली, DSEU-MAAC डिग्री साझेदारी के तहत 12वीं के बाद छात्रों को उद्योग आधारित प्रशिक्षण के साथ विश्वविद्यालय की मान्यता प्राप्त डिग्री मिलेगी। दूसरी, राष्ट्रीय फिल्म एवं डिजाइन हैकाथॉन के माध्यम से दिल्ली सरकार के स्कूलों के लगभग 20 हजार विद्यार्थियों को डिजिटल कंटेंट निर्माण, फिल्म, मीडिया और डिजाइन के क्षेत्र में निःशुल्क व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। तीसरी, दिल्ली क्रिएटर्स एवं AVGC-XR फेडरेशन का गठन किया जाएगा, जिसमें एनीमेशन, गेमिंग, विजुअल इफेक्ट्स और तकनीक क्षेत्र के 300 से अधिक विशेषज्ञ शामिल होकर उद्योगोन्मुखी नीतियों के निर्माण में सहयोग करेंगे।

आशीष सूद ने बताया कि भारत सरकार ने AVGC-XR (Animation, Visual Effects, Gaming, Comics और Extended Reality) क्षेत्र को देश का प्रमुख “सनराइज सेक्टर” घोषित किया है। यह उद्योग वर्तमान में लगभग 16 से 17 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से आगे बढ़ रहा है और वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र में करीब 20 लाख प्रशिक्षित पेशेवरों की आवश्यकता होने का अनुमान है। ऐसे में दिल्ली सरकार की यह पहल युवाओं को भविष्य की मांग के अनुरूप कौशल और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार विद्यालय स्तर से लेकर विश्वविद्यालय और उद्योग तक एक मजबूत कौशल विकास तंत्र तैयार कर रही है, ताकि छात्रों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण और बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकें। सरकार का मानना है कि यह पहल युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के साथ-साथ भारत को क्रिएटिव इंडस्ट्री का वैश्विक केंद्र बनाने में भी अहम योगदान देगी। साथ ही यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “Create in India, Create for the World” विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।


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