दिल्ली के हजारों साल पुराने इतिहास पर होगा गहन शोध
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (11 July 2026): दिल्ली सरकार ने राजधानी की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत के संरक्षण तथा वैज्ञानिक अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘अभिलेखागार अनुसंधान फेलोशिप’ और ‘पुरातत्व अनुसंधान फेलोशिप’ योजनाओं को मंजूरी दे दी गई है। इन योजनाओं के माध्यम से दिल्ली के हजारों वर्षों पुराने इतिहास, अभिलेखों, पांडुलिपियों, स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों का शोध, दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण किया जाएगा, ताकि राजधानी की विरासत को प्रमाणिक रूप से नई पीढ़ी और शोधकर्ताओं तक पहुंचाया जा सके।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली केवल देश की राजधानी नहीं, बल्कि अनेक सभ्यताओं और ऐतिहासिक कालखंडों की जीवंत धरोहर है। सरकार का उद्देश्य इस अमूल्य विरासत का संरक्षण, वैज्ञानिक अध्ययन और व्यवस्थित अभिलेखीकरण करना है। उन्होंने बताया कि ‘अभिलेखागार अनुसंधान फेलोशिप’ के तहत ऐतिहासिक अभिलेखों पर उच्च स्तरीय शोध, रिकॉर्ड प्रबंधन, दस्तावेजों के संरक्षण, डिजिटलीकरण, माइक्रो-फिल्मिंग, शोध एवं प्रकाशन के साथ-साथ उर्दू और फारसी जैसी प्राचीन भाषाओं से जुड़े अभिलेखों पर भी विशेष कार्य किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, अभिलेखागार अनुसंधान फेलोशिप के अंतर्गत हर वर्ष एक वर्ष की अवधि के लिए 15 फेलो नियुक्त किए जाएंगे। इन शोधार्थियों को उनकी परियोजनाओं के अनुसार प्रतिमाह 25 हजार से 50 हजार रुपये तक की फेलोशिप दी जाएगी। इस योजना का लाभ इतिहासकारों, अभिलेख विशेषज्ञों, संरक्षण विशेषज्ञों, भाषाविदों और विरासत अध्ययन से जुड़े शोधकर्ताओं को मिलेगा, जिससे दिल्ली के ऐतिहासिक दस्तावेजों पर गंभीर और संस्थागत शोध को नई दिशा मिलेगी।
वहीं ‘पुरातत्व अनुसंधान फेलोशिप’ के तहत दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारकों, पुरातात्विक स्थलों और विशेष रूप से कम चर्चित धरोहरों के इतिहास, वास्तुकला, संरक्षण और संवर्धन पर शोध को बढ़ावा दिया जाएगा। इस योजना के तहत भी प्रत्येक वर्ष 12 फेलो का चयन किया जाएगा और उन्हें एक वर्ष तक 25 हजार से 50 हजार रुपये प्रतिमाह फेलोशिप प्रदान की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे विरासत संरक्षण के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी और राजधानी की ऐतिहासिक पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दोनों योजनाओं के माध्यम से अभिलेख, पुरातत्व और विरासत संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित विशेषज्ञों का मजबूत समूह तैयार होगा, जो भविष्य में दिल्ली के इतिहास के संरक्षण और शोध कार्यों को नई दिशा देगा। उन्होंने बताया कि पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, चयन मानदंड और अन्य नियमों से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश संबंधित विभाग जल्द जारी करेंगे। दिशानिर्देश अधिसूचित होने के बाद दोनों फेलोशिप योजनाओं को शुरू कर शोधार्थियों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।
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