दिल्ली में दशहरे पर रावण के साथ जलेगा ‘कॉकरोच’ और ‘ज्ञानेश कुमार’ का पुतला

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (20 October 2026): दिल्ली (Delhi) में दशहरे (Dussehra) के अवसर पर इस बार रावण दहन के साथ राजनीतिक प्रतीकों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। वर्षों से दशमी के दिन राजधानी के अलग-अलग इलाकों में रावण के पुतले जलाने की परंपरा चली आ रही है, लेकिन इस साल कुछ आयोजन अपने अलग अंदाज के कारण सुर्खियों में हैं। नवमी के दिन कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया, जबकि दशमी के दिन रावण दहन की तैयारियां की जा रही हैं। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi), राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) के द्वारका (Dwarka) स्थित रामलीला मैदान में आयोजित रावण दहन कार्यक्रम में शामिल होने का कार्यक्रम बताया गया है। वीआईपी आगमन और दशहरे के आयोजनों को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ यातायात डायवर्जन की व्यवस्था भी की गई है।

इस बीच, पीतमपुरा (Pitampura) में 30 फीट ऊंचे कॉकरोच के प्रतीकात्मक पुतले के दहन की तैयारी चर्चा का विषय बनी हुई है। कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party) नाम से चर्चा में आए संगठन ने इससे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) के इस्तीफे की मांग को लेकर सुर्खियां बटोरी थीं। अब संगठन की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के इस्तीफे की मांग भी सामने आई है। दशहरे के मौके पर कॉकरोच का विशाल पुतला जलाने की तैयारी को इसी राजनीतिक विरोध से जोड़कर देखा जा रहा है। इस आयोजन ने दशहरे की पारंपरिक परंपरा को राजनीतिक संदेश देने के एक नए तरीके के रूप में चर्चा में ला दिया है। हालांकि, आयोजन से जुड़े दावों और कार्यक्रम के वास्तविक स्वरूप की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

दूसरी ओर, इंडियन यूथ कांग्रेस (Indian Youth Congress) की ओर से भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पुतले के दहन की तैयारी किए जाने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि इस प्रतीकात्मक पुतले पर भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के कुछ नेताओं की तस्वीरें भी लगाई गई हैं। इस घटनाक्रम ने दशहरे के आयोजन को राजनीतिक रंग दे दिया है। एक तरफ कॉकरोच के पुतले के दहन को लेकर समर्थकों में उत्साह दिखाई दे रहा है, तो दूसरी तरफ यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता अपने विरोध के जरिए चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के प्रति नाराजगी जाहिर करने की तैयारी में हैं। संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ इस तरह के प्रतीकात्मक विरोध को लेकर राजनीतिक मर्यादा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी बहस छिड़ सकती है।

दिल्ली में दशहरे के अवसर पर होने वाले इन आयोजनों के बीच अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित संगठन अपने कार्यक्रम किस तरह संपन्न करते हैं और इसके बाद राजनीतिक दलों की ओर से क्या प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं। रावण दहन को परंपरागत रूप से बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इस बार अलग-अलग पुतलों के जरिए राजनीतिक संदेश देने की कोशिशों ने इसे एक नई बहस से जोड़ दिया है। जहां एक ओर कॉकरोच के पुतले का दहन चर्चा में है, वहीं दूसरी ओर ज्ञानेश कुमार के पुतले को लेकर यूथ कांग्रेस की कथित तैयारी भी राजनीतिक टकराव को उजागर कर रही है। अब देखना होगा कि दशहरे के इन कार्यक्रमों के बाद भाजपा, कांग्रेस और संबंधित संगठन क्या आधिकारिक बयान जारी करते हैं और इस प्रतीकात्मक विरोध का राजनीतिक असर कितना देखने को मिलता है।


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