ITS इंजीनियरिंग कॉलेज में पायथन प्रोग्रामिंग पर एफडीपी का तीसरा दिन संपन्न

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (09/07/2026): आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज के अनुप्रयुक्त विज्ञान एवं मानविकी विभाग द्वारा आयोजित पायथन प्रोग्रामिंग विषयक संकाय विकास कार्यक्रम (Faculty Development Program-FDP) का तीसरा दिन उत्साह, सक्रिय सहभागिता और व्यावहारिक शिक्षण गतिविधियों के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तीसरे दिन संकाय सदस्यों ने पायथन प्रोग्रामिंग की उन्नत अवधारणाओं का अध्ययन किया तथा विभिन्न तकनीकी सत्रों के माध्यम से अपने प्रोग्रामिंग ज्ञान और व्यावहारिक कौशल को और अधिक मजबूत बनाया।

तीन दिनों से जारी इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों का आत्मविश्वास लगातार बढ़ता दिखाई दिया। संवादात्मक शिक्षण पद्धति, लाइव कोडिंग अभ्यास और समस्या-समाधान आधारित गतिविधियों के माध्यम से संकाय सदस्यों ने प्रोग्रामिंग से जुड़े विभिन्न विषयों को गहराई से समझा। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक प्रोग्रामिंग तकनीकों से परिचित कराना तथा उनके शैक्षणिक और तकनीकी कौशल का विकास करना रहा।

कार्यक्रम के तीसरे दिन कुल चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनका संचालन प्रतिष्ठित संसाधन विशेषज्ञ सुश्री आस्था गोयल और श्री आशीष कुमार गुप्ता ने किया। दोनों विशेषज्ञों ने विषय को सरल, व्यावहारिक और संवादात्मक शैली में प्रस्तुत करते हुए प्रतिभागियों को पायथन प्रोग्रामिंग के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया।

सुश्री आस्था गोयल ने अपने सत्रों में पायथन के लूप्स (Loops) और ब्रेक स्टेटमेंट (Break Statement) की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दोहराव आधारित कार्यों को सरल बनाने में लूप्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जबकि ब्रेक स्टेटमेंट का उपयोग आवश्यक परिस्थितियों में प्रोग्राम के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। उन्होंने वास्तविक जीवन से जुड़े उदाहरणों और लाइव कोडिंग डेमो के माध्यम से प्रतिभागियों को इन अवधारणाओं का व्यावहारिक उपयोग भी समझाया, जिससे विषय को समझना और अधिक सहज हो गया।

इसके बाद आयोजित तकनीकी सत्रों में श्री आशीष कुमार गुप्ता ने प्रतिभागियों को पायथन में फ़ंक्शन्स (Functions) की उपयोगिता और महत्त्व से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि फ़ंक्शन्स के माध्यम से किसी भी बड़े प्रोग्राम को व्यवस्थित, सरल और प्रभावी बनाया जा सकता है। साथ ही, कोड की पुनः उपयोगिता (Code Reusability) बढ़ाने, अनावश्यक दोहराव से बचने तथा समस्या-समाधान की प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाने में फ़ंक्शन्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कई व्यावहारिक उदाहरणों और लाइव प्रदर्शन के माध्यम से इन अवधारणाओं को विस्तार से समझाया।

पूरे दिन आयोजित सत्रों के दौरान संकाय सदस्यों ने कोडिंग अभ्यास, समूह चर्चाओं और प्रश्नोत्तर गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से विभिन्न तकनीकी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया और पायथन प्रोग्रामिंग से संबंधित कई व्यावहारिक पहलुओं को समझने का अवसर मिला।

कार्यक्रम के दौरान संसाधन विशेषज्ञों की सहयोगात्मक एवं व्यवहारिक शिक्षण शैली को प्रतिभागियों ने काफी सराहा। व्यावहारिक प्रशिक्षण, संवादात्मक प्रस्तुति और अभ्यास आधारित शिक्षण के कारण प्रतिभागियों को पायथन प्रोग्रामिंग की अवधारणाओं को गहराई से समझने में सहायता मिली। कॉलेज प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के संकाय विकास कार्यक्रम शिक्षकों के तकनीकी ज्ञान को अद्यतन रखने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को भी नई दिशा प्रदान करेंगे।


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