Greater Noida News (07/07/2026): उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने महर्षि महेश योगी अंतरराष्ट्रीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ कानपुर जनपद के बिल्हौर में प्रस्तावित विश्वविद्यालय की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है। इसे प्रदेश में कृषि शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कैबिनेट की स्वीकृति के बाद महर्षि संस्थान परिवार में खुशी का माहौल है। संस्थान के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और मंत्रिपरिषद के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार का यह निर्णय कृषि और उच्च शिक्षा दोनों क्षेत्रों के लिए दूरगामी परिणाम लेकर आएगा।
संस्थान के अध्यक्ष अजय प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश के साथ-साथ देश के कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने का कार्य करेगा। उनके अनुसार बिल्हौर में इस विश्वविद्यालय की स्थापना से आसपास के जिलों के विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली कृषि शिक्षा, शोध और कौशल विकास के अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में कृषि अनुसंधान, आधुनिक तकनीकों के विकास, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ कृषि प्रणाली पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उनका मानना है कि यह संस्थान वैज्ञानिक सोच और व्यावहारिक कृषि शिक्षा के माध्यम से किसानों और युवाओं के लिए उपयोगी साबित होगा।
अजय प्रकाश श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय महर्षि महेश योगी की उस सोच को आगे बढ़ाएगा, जिसमें प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि और पर्यावरण संरक्षण को कृषि विकास का आधार माना गया था। उन्होंने विश्वास जताया कि यह संस्थान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य को साकार करने में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

संस्थान के उपाध्यक्ष राहुल भारद्वाज ने कहा कि राज्य सरकार की मंजूरी के साथ महर्षि महेश योगी का एक महत्वपूर्ण सपना साकार होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य जैविक खेती को बढ़ावा देना, कृषि शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करना और भारत को प्राकृतिक एवं जैविक कृषि के क्षेत्र में मजबूत पहचान दिलाना है।
वहीं, गवर्निंग बॉडी के सदस्य पंकज शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय किसानों तक वैज्ञानिक अनुसंधान पर आधारित उन्नत कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती और जैविक कृषि की आधुनिक पद्धतियों को पहुंचाने का कार्य करेगा। इससे खेती की लागत कम करने, उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय को शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के एक उत्कृष्ट केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। यहां कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और किसानों के बीच ज्ञान और तकनीक का समन्वय स्थापित किया जाएगा, जिससे कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों का तेजी से प्रसार हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिल्हौर में महर्षि महेश योगी अंतरराष्ट्रीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना से उत्तर प्रदेश में कृषि शिक्षा को नई गति मिलेगी। साथ ही यह संस्थान आधुनिक कृषि अनुसंधान, जैविक खेती और किसानों के कौशल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देकर प्रदेश को कृषि नवाचार का एक प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है।
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