दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा MCD के नए टोल टेंडर का मामला, पात्रता शर्तों पर उठे सवाल

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (30 June 2026): दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा राजधानी की सीमाओं पर टोल और पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) की वसूली के लिए जारी किए गए नए टेंडर को लेकर विवाद गहरा गया है। टोल संग्रह प्रणाली को मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक में अपग्रेड करने के लिए निकाले गए इस टेंडर की पात्रता शर्तों को चुनौती देते हुए दो संभावित कंपनियों शिवा कॉरपोरेशन और स्काईलार्क इंफ्रा इंजीनियरिंग ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। कंपनियों का आरोप है कि टेंडर में रखी गई योग्यता संबंधी शर्तें इतनी कड़ी हैं कि अधिकांश इच्छुक कंपनियां प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाएंगी, जिससे निष्पक्ष और खुली बोली प्रक्रिया प्रभावित होगी।

याचिकाकर्ताओं का मुख्य विरोध उस शर्त को लेकर है, जिसमें किसी कंपनी के पास एक ही अनुबंध के तहत कम से कम दो वर्षों तक कुल टोल लेनों के 50 प्रतिशत यानी 122 टोल लेनों के संचालन का अनुभव होना अनिवार्य किया गया है। कंपनियों का कहना है कि यह शर्त बेहद सीमित और प्रतिबंधात्मक है, जिससे केवल कुछ चुनिंदा कंपनियां ही पात्र रह जाएंगी। उनका तर्क है कि इतनी सख्त पात्रता प्रतिस्पर्धा को कम करेगी और बेहतर तकनीकी व वित्तीय प्रस्ताव देने वाली अन्य कंपनियों को अवसर नहीं मिल पाएगा।

इस टेंडर के तहत MCD दिल्ली की सीमाओं पर स्थित 154 टोल प्लाजा और कुल 244 टोल लेनों के संचालन के लिए एजेंसी नियुक्त करना चाहता है। चयनित कंपनी को व्यावसायिक वाहनों से टोल और पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क की वसूली के साथ-साथ मौजूदा RFID आधारित प्रणाली को आधुनिक मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) प्रणाली में बदलने का कार्य भी करना होगा। हालांकि, संभावित बोलीदाताओं का कहना है कि प्री-बिड बैठक के दौरान भी उन्होंने इन पात्रता शर्तों पर आपत्ति जताई थी, लेकिन उनकी चिंताओं पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2024 में MCD ने इसी प्रकार का एक टेंडर जारी किया था, जिसमें अत्यधिक सख्त पात्रता शर्तों के कारण केवल दो कंपनियां ही योग्य ठहर सकी थीं। उस समय सीमित प्रतिस्पर्धा और सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए MCD ने स्वयं उस टेंडर को रद्द कर दिया था। इसके बाद वर्ष 2025 में पात्रता शर्तों की समीक्षा करते हुए आवश्यक अनुभव की सीमा 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत कर दी गई थी, ताकि अधिक कंपनियां भाग ले सकें और प्रतिस्पर्धा बढ़े।

अब याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान टेंडर में फिर से पुरानी 50 प्रतिशत अनुभव वाली शर्त लागू कर दी गई है, जो MCD के पहले के रुख और दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष दिए गए तर्कों के भी विपरीत है। उनका दावा है कि यदि इस शर्त में संशोधन नहीं किया गया तो निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित होगी और निगम को भी बेहतर आर्थिक प्रस्ताव मिलने की संभावना कम हो जाएगी। अब इस पूरे मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई और उसके फैसले पर सभी संभावित बोलीदाताओं तथा MCD की अगली कार्रवाई निर्भर करेगी।


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