चुनाव के दौरान दिल्ली मेट्रो में नहीं दिखेंगे राजनीतिक विज्ञापन, हाई कोर्ट

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (21 June 2026): दिल्ली हाई कोर्ट ने चुनावी अवधि के दौरान दिल्ली मेट्रो परिसरों में राजनीतिक विज्ञापनों पर लगी रोक को बरकरार रखते हुए स्पष्ट कर दिया है कि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ऐसे प्रतिबंध आवश्यक हैं। अदालत ने चुनाव आयोग के फैसले को पूरी तरह सही ठहराते हुए कहा कि मेट्रो जैसी सार्वजनिक और सरकारी व्यवस्था से जुड़ी जगहों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार के लिए नहीं किया जा सकता। इस फैसले के बाद चुनावी मौसम में मेट्रो स्टेशनों और ट्रेनों के भीतर राजनीतिक दलों के विज्ञापन दिखाई नहीं देंगे।

मामला तब सामने आया जब कुछ विज्ञापन एजेंसियों ने चुनाव आयोग के निर्देशों को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी। आयोग ने आदर्श आचार संहिता लागू होने के दौरान दिल्ली मेट्रो की संपत्तियों पर किसी भी प्रकार के राजनीतिक विज्ञापन लगाने पर रोक लगा दी थी। एजेंसियों का तर्क था कि यह फैसला उनके व्यवसाय और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों का उल्लंघन करता है। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि सार्वजनिक हित तथा चुनावी निष्पक्षता किसी भी व्यावसायिक हित से अधिक महत्वपूर्ण हैं।

सुनवाई के दौरान विज्ञापन एजेंसियों ने यह भी सवाल उठाया कि जब बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर राजनीतिक विज्ञापन लगाए जा सकते हैं तो मेट्रो को इससे अलग क्यों रखा जा रहा है। इस पर हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दिल्ली मेट्रो की प्रकृति अन्य सार्वजनिक स्थलों से भिन्न है। अदालत के अनुसार मेट्रो सीधे तौर पर सरकारी व्यवस्था और सार्वजनिक परिवहन प्रणाली का हिस्सा है, इसलिए इसे सामान्य विज्ञापन स्थलों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसी वजह से चुनावी प्रचार के लिए इसके उपयोग पर रोक उचित है।

दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने भी अदालत में चुनाव आयोग के निर्देशों का समर्थन किया। डीएमआरसी ने कहा कि एक सरकारी इकाई होने के नाते वह चुनाव आयोग द्वारा जारी नियमों और दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य है। निगम ने अदालत को बताया कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी का हिस्सा है और आयोग के निर्देशों के अनुरूप ही मेट्रो परिसरों में विज्ञापन नीति लागू की जाती है।

चुनाव आयोग ने अदालत में अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर प्रदान करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मूल आवश्यकता है। आयोग ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए यह निर्देश जारी किए गए थे ताकि कोई भी राजनीतिक दल सरकारी संसाधनों या सार्वजनिक संस्थानों का लाभ लेकर अनुचित बढ़त हासिल न कर सके। हाई कोर्ट ने भी इस तर्क से सहमति जताई और कहा कि स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोग द्वारा उठाया गया यह कदम पूरी तरह वैध और कानून सम्मत है।


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