क्या डूब जाएगा भारतीय शेयर बाजार या आएगी नई तेजी? जानिए गिरावट के पीछे के बड़े कारण
टेन न्यूज नेटवर्क
New Delhi News (13 जून 2026): पिछले कुछ समय से भारतीय शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव और गिरावट देखने को मिल रही है। इसके साथ ही सोने और चांदी की कीमतों में भी कमजोरी दर्ज की गई है। बाजार की मौजूदा स्थिति को लेकर निवेशकों के बीच चिंता बढ़ी है कि क्या यह गिरावट आगे भी जारी रहेगी या फिर बाजार में दोबारा तेजी लौटेगी। बाजार की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए प्रख्यात निवेशक और वित्तीय विश्लेषक शंकर शर्मा, जो फर्स्ट ग्लोबल के सह-संस्थापक हैं, ने गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारणों की ओर संकेत किया है।
शेयर बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय बाजार पर वर्तमान में कई वैश्विक और घरेलू कारक दबाव बना रहे हैं:
1. पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा संभावित सैन्य संघर्ष की आशंकाओं ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर भी पड़ रहा है।
2. अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति और ऊंची ब्याज दरों के कारण वैश्विक निवेशकों का रुझान अमेरिकी परिसंपत्तियों की ओर बढ़ा है। इससे उभरते बाजारों, जिनमें भारत भी शामिल है, से पूंजी का प्रवाह प्रभावित हुआ है।
3. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा लगातार निकासी भारतीय बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। वर्ष 2025 में FIIs ने भारतीय इक्विटी बाजार से रिकॉर्ड स्तर पर शुद्ध निकासी की थी। वहीं 2026 की पहली छमाही में भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रही, जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ है।
4. आईटी सेक्टर पर एआई का प्रभाव
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव ने पारंपरिक आईटी सेवाओं के भविष्य को लेकर नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। निवेशक आईटी कंपनियों की भविष्य की कमाई को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं, जिसका असर इस क्षेत्र के शेयरों पर भी दिखाई दे रहा है।
क्या विदेशी निवेशक भारत से पूरी तरह बाहर निकल रहे हैं?
विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से पूरी तरह दूरी नहीं बनाई है। वैश्विक तनाव और सुरक्षित निवेश विकल्पों की तलाश के कारण फिलहाल पूंजी का कुछ हिस्सा अन्य बाजारों की ओर गया है। हालांकि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, बढ़ता घरेलू निवेश और उपभोग आधारित अर्थव्यवस्था अभी भी वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने की क्षमता रखती है।
इतिहास क्या कहता है?
भारतीय शेयर बाजार इससे पहले भी कई बड़े संकटों का सामना कर चुका है।
2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान बाजार में भारी गिरावट आई थी।
2020 के कोविड-19 संकट में भी निवेशकों को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ा था।
लेकिन दोनों ही परिस्थितियों में बाजार ने समय के साथ मजबूत वापसी की और नए रिकॉर्ड बनाए। यही कारण है कि कई विशेषज्ञ मौजूदा गिरावट को स्थायी संकट नहीं, बल्कि अस्थायी दबाव मान रहे हैं।
भविष्य में क्या हो सकता है?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यदि वैश्विक तनाव कम होता है, कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं और विदेशी निवेशकों का विश्वास लौटता है, तो भारतीय शेयर बाजार में दोबारा तेजी देखने को मिल सकती है। इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रुपये को स्थिर रखने और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देने के प्रयास भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।
हालांकि निकट अवधि में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से भारत की आर्थिक संभावनाएं मजबूत दिखाई देती हैं। ऐसे में विशेषज्ञ निवेशकों को घबराहट में निर्णय लेने के बजाय सोच-समझकर और दीर्घकालिक रणनीति के साथ निवेश करने की सलाह दे रहे हैं।
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