डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण: बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई नहीं करेगी राज्य सरकार
टेन न्यूज नेटवर्क
Gautam Buddha Nagar News (11/06/2026): गौतमबुद्ध नगर में हिंडन और यमुना नदी के डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ सिंचाई विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि डूब क्षेत्र में बने या बन रहे अवैध भवनों, फार्म हाउसों और औद्योगिक इकाइयों को बाढ़ से होने वाली किसी भी क्षति के लिए निर्माणकर्ता स्वयं जिम्मेदार होंगे। ऐसे मामलों में शासन की ओर से न तो कोई मुआवजा दिया जाएगा और न ही बाढ़ सुरक्षा संबंधी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
अधिशासी अभियंता, सिंचाई निर्माण खंड गाजियाबाद ने बताया कि हिंडन नदी के तटवर्ती क्षेत्रों और रिंग बंध के निकट स्थित छजारसी, चोटपुर, यूसुफपुर, चकशाहबेरी, बहलोलपुर, गढ़ी चौखंडी, हैबतपुर, परथला खंजरपुर, सौरखा जाहिदाबाद, ककराला, जलपुरा, हल्दोनी और कुलेसरा सहित कई गांव डूब क्षेत्र की सीमा में आते हैं। वहीं हिंडन-यमुना दोआब बंध और यमुना नदी के किनारे बसे इलाहावास, सूथियाना, शहदरा, लखनावली, बेगमपुर, मुबारकपुर, गुर्जरपुर, बादौली बांगर, तुगलपुर, कोंडली बांगर, शफीपुर, चुहड़पुर, मोमनाथल, मोतीपुर, तिलवाड़ा, छपरौली और असदुल्लापुर समेत अन्य गांव भी इस श्रेणी में शामिल हैं।
विभाग के अनुसार इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में भवन, स्कूल, फार्म हाउस, क्रेशर प्लांट, हॉट मिक्स प्लांट, रेडी मिक्स कंक्रीट प्लांट और रेत धुलाई की होदियों जैसे अवैध निर्माण किए गए हैं। बाढ़ के दौरान नदी की प्राकृतिक धारा बाधित होने से इन निर्माणों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है, जिससे बड़े पैमाने पर जन-धन की हानि होने की आशंका बनी रहती है।
सिंचाई विभाग ने कहा कि शासनादेश संख्या 1417/27-सिं-2-181/बाढ़/09 दिनांक 16 मार्च 2010 और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा 20 मई 2013 को पारित आदेशों के तहत डूब क्षेत्र में इस प्रकार के निर्माण प्रतिबंधित हैं। आदेशों के अनुसार बाढ़ से होने वाली क्षति की कोई प्रतिपूर्ति शासन द्वारा नहीं की जाएगी और न ही ऐसे क्षेत्रों में विशेष बाढ़ सुरक्षा कार्य कराए जाएंगे। इतना ही नहीं, अवैध निर्माणों के कारण होने वाली क्षति की भरपाई भी संबंधित निर्माणकर्ताओं से की जा सकती है।
सिंचाई विभाग ने आमजन से अपील करते हुए कहा है कि डूब क्षेत्र में किए गए अवैध निर्माणों को तत्काल हटाया जाए या ध्वस्त किया जाए तथा भविष्य में कोई नया निर्माण न किया जाए। अन्यथा प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ किसी भी अप्रत्याशित जन-धन की हानि के लिए संबंधित निर्माणकर्ता स्वयं उत्तरदायी होंगे। विभाग और जिला प्रशासन इसके लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।।
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