Noida News (03/06/2026): 13 अप्रैल को नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में हुई व्यापक श्रमिक हिंसा की जांच में पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दिल्ली विश्वविद्यालय में एलएलबी की पढ़ाई कर रहे छात्र योगेश मीणा को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी न केवल छात्र राजनीति में सक्रिय रहा है बल्कि वह श्रमिक संगठनों से जुड़े कुछ वैचारिक समूहों के संपर्क में भी था।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब तक जुटाए गए साक्ष्य इस बात की ओर संकेत करते हैं कि हिंसक घटनाएं अचानक नहीं हुई थीं, बल्कि इसके पीछे सुनियोजित रणनीति तैयार की गई थी। जांच में सामने आया है कि योगेश मीणा ने विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्मों के माध्यम से श्रमिकों के बीच असंतोष को बढ़ावा देने का प्रयास किया था।
राजस्थान के जयपुर निवासी योगेश मीणा पूर्व में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) अध्यक्ष पद के चुनाव में भी अपनी दावेदारी पेश कर चुका है। पुलिस का दावा है कि आरोपी की गतिविधियों का विश्लेषण करने पर कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, जिनके आधार पर उसकी गिरफ्तारी की गई।
जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने सोशल मीडिया मंचों और अनेक व्हाट्सऐप समूहों में सक्रिय रहकर ऐसी सूचनाएं प्रसारित कीं, जिनसे श्रमिकों के बीच भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा हुई। पुलिस का आरोप है कि उसने कुछ संदेशों के माध्यम से यह धारणा बनाने की कोशिश की कि नोएडा पुलिस से जुड़े एक व्यक्ति का आंदोलनकारी श्रमिकों से सीधा संपर्क है और वह उन्हें प्रभावित कर रहा है।
हालांकि जांच के दौरान पुलिस ने इस दावे को भ्रामक बताया है। अधिकारियों के अनुसार, जिस व्यक्ति का नाम सामने आया था, उसकी पहचान अनिल के रूप में हुई थी, जिसे पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि विस्तृत पड़ताल में यह तथ्य सामने आया कि अनिल का किसी भी पुलिस अधिकारी से कोई संबंध नहीं था और वह किसी अधिकारी का चालक भी नहीं था।
जांच एजेंसियों को मिले तकनीकी डेटा और कॉल रिकॉर्ड के विश्लेषण में यह सामने आया है कि योगेश मीणा और अनिल के बीच नियमित संपर्क बना हुआ था। पुलिस के मुताबिक, हिंसा वाले दिन भी दोनों के बीच कई बार संवाद हुआ था। यही कारण है कि जांच में योगेश की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित संदेशों और अफवाहों का असर बड़ी संख्या में श्रमिकों पर पड़ा, जिसके बाद कई औद्योगिक क्षेत्रों में हालात बिगड़ गए। उपद्रव के दौरान अनेक औद्योगिक इकाइयों, फैक्ट्रियों और कार्यालय परिसरों में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा के दौरान सैकड़ों औद्योगिक प्रतिष्ठान प्रभावित हुए। कई स्थानों पर संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया, जबकि कुछ इलाकों में वाहनों और अन्य परिसंपत्तियों को आग के हवाले कर दिया गया। आगजनी और तोड़फोड़ से उद्योगों को भारी आर्थिक क्षति होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि पूरे मामले में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, चैट रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि इन साक्ष्यों के आधार पर हिंसा की साजिश में शामिल अन्य लोगों की पहचान भी की जा रही है। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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