रिज क्षेत्र के संरक्षण को लेकर दिल्ली में ‘रिज मैनेजमेंट बोर्ड’ का पुनर्गठन

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (02 June 2026): दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने 2 जून 2026 को दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड (डीआरएमबी) के पुनर्गठन को औपचारिक मंजूरी दे दी है। यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के T. N. Godavarman Thirumulpad vs Union of India मामले में दिए गए निर्देशों और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के अनुरूप उठाया गया है। नए ढांचे का उद्देश्य दिल्ली के रिज क्षेत्र के संरक्षण, निगरानी और प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है। राजधानी के पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर चिंता व्यक्त की जाती रही है। सरकार का मानना है कि पुनर्गठित बोर्ड के जरिए संरक्षण संबंधी प्रयासों को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।

दिल्ली का रिज क्षेत्र राजधानी के पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ माना जाता है और इसे शहर के ‘ग्रीन लंग्स’ के रूप में भी जाना जाता है। यह क्षेत्र न केवल जैव विविधता को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, बल्कि बढ़ते शहरीकरण के बीच तापमान नियंत्रण, वायु गुणवत्ता सुधार और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी मदद करता है। हालांकि पिछले कई वर्षों से अतिक्रमण, अवैध निर्माण और विकास परियोजनाओं के दबाव के कारण इस क्षेत्र की पारिस्थितिकीय स्थिति प्रभावित होती रही है। पर्यावरणविदों और न्यायालयों द्वारा समय-समय पर इस क्षेत्र की बेहतर निगरानी और संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया जाता रहा है। ऐसे में बोर्ड का पुनर्गठन एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।

पुनर्गठित डीआरएमबी की अध्यक्षता दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव करेंगे, जबकि Delhi Development Authority के उपाध्यक्ष इसके प्रमुख सदस्यों में शामिल होंगे। इसके अलावा Ministry of Environment, Forest and Climate Change तथा Ministry of Housing and Urban Affairs के वरिष्ठ अधिकारियों को भी बोर्ड में स्थान दिया गया है। दिल्ली नगर निगम, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, दिल्ली पुलिस, राजस्व विभाग और पर्यावरण एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी बोर्ड का हिस्सा होंगे। जमीनी स्तर पर निगरानी और कार्यान्वयन की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार के प्रधान मुख्य वन संरक्षक को सदस्य सचिव के रूप में सौंपी गई है, जिससे संरक्षण कार्यों में निरंतरता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

बोर्ड में विशेषज्ञों और नागरिक समाज की भागीदारी को भी विशेष महत्व दिया गया है। केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति के प्रतिनिधि के रूप में चंद्र प्रकाश गोयल को विशेषज्ञ सदस्य बनाया गया है। वहीं सेंटर फॉर सस्टेनेबल ग्रीन इकोनॉमी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरविंद माधव सिंह और संकल्प फाउंडेशन की अनुसंधान एवं संचार निदेशक डॉ. मालविका कौल को गैर-सरकारी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। सरकार का मानना है कि विशेषज्ञों और नागरिक संगठनों की भागीदारी से संरक्षण संबंधी नीतियों में व्यावहारिकता आएगी और स्थानीय समुदायों की भूमिका भी मजबूत होगी। इसके साथ ही लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने में भी मदद मिलेगी।

डीआरएमबी के अंतर्गत एक स्थायी समिति के गठन का भी प्रावधान किया गया है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति के एक नामित सदस्य द्वारा की जाएगी। इस समिति को रिज क्षेत्र से जुड़े मामलों में त्वरित निर्णय लेने, निगरानी बढ़ाने और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे समय में जब दिल्ली वायु प्रदूषण और हरित क्षेत्रों के लगातार घटते दायरे जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बोर्ड की सफलता केवल उसके गठन से नहीं, बल्कि इस बात से तय होगी कि वह अतिक्रमण, अवैध निर्माण और पर्यावरणीय उल्लंघनों के खिलाफ कितनी प्रभावी कार्रवाई कर पाता है। अब सभी की नजर बोर्ड की पहली बैठक और उसके बाद जमीन पर दिखाई देने वाले परिणामों पर टिकी हुई है।


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