‘हाथरस 16 डेज’ पर सियासत तेज: महिला कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

टेन न्यूज नेटवर्क

नई दिल्ली (22 मई 2026): वर्ष 2020 के चर्चित हाथरस सामूहिक दुष्कर्म मामले पर बनी नई क्राइम डॉक्यूमेंट्री ‘हाथरस 16 डेज’ को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। महिला कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस मामले में दोषियों को बचाने के लिए तत्कालीन भाजपा सरकार और सरकारी तंत्र ने गंभीर लापरवाही बरती थी।

नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में 21 मई 2026 को आयोजित पत्रकार वार्ता में महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा ने डॉक्यूमेंट्री में सामने आए तथ्यों के आधार पर मामले की दोबारा जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि साक्ष्यों को नष्ट करने और जांच में लापरवाही बरतने वाले तत्कालीन एसपी, डीएम और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

प्रेस वार्ता के दौरान डॉक्यूमेंट्री के वीडियो अंश और कथित साक्ष्य भी दिखाए गए। अलका लांबा ने कहा कि पीड़िता को न्याय से वंचित करने के लिए पूरा सिस्टम सक्रिय था। उन्होंने डॉक्यूमेंट्री में दिखाए गए एक स्त्री रोग विशेषज्ञ के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि पीड़िता को अस्पताल ले जाने से पहले उसे नहलाया-धुलाया गया, जिससे अहम सबूत नष्ट हो गए। इसके बावजूद समय रहते उचित जांच नहीं की गई।

उन्होंने कहा कि पीड़िता ने मौत से पहले अपने साथ गलत होने की बात कही थी, लेकिन उसके बयान को गंभीरता से नहीं लिया गया। लांबा के अनुसार घटना के आठ दिन बाद साक्ष्य जुटाए गए और कपड़ों समेत कई महत्वपूर्ण सबूत समय पर एकत्र नहीं किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई अहम साक्ष्य अदालत में पेश ही नहीं किए गए, जिससे मामला कमजोर हुआ और दोषियों को लाभ मिला।

महिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पुलिस की लापरवाही और कमजोर जांच के कारण 2 मार्च 2023 को अदालत ने चार आरोपियों में से तीन को बरी कर दिया। उन्होंने कहा कि डॉक्यूमेंट्री में यह भी दिखाया गया है कि पीड़िता की स्पाइनल कॉर्ड गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त थी और उसे बुरी तरह घसीटा गया था। इसके बावजूद उसे समय पर उचित चिकित्सा सुविधा, एंबुलेंस और स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं कराया गया।

अलका लांबा ने तत्कालीन एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस ने मामले में संवेदनशीलता नहीं दिखाई। यदि समय पर सबूत जुटाए जाते तो आरोपियों को कड़ी सजा मिल सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय उन्हें केवल निलंबित कर बाद में दूसरी जगह तैनात कर दिया गया।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि किसके दबाव में आधी रात को पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार परिवार की सहमति के बिना कर दिया गया। लांबा ने कहा कि पीड़ित परिवार को कथित तौर पर नजरबंद कर दिया गया था और उन्हें अंतिम बार बेटी का चेहरा देखने तक की अनुमति नहीं दी गई।

महिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जब 1 अक्टूबर 2020 को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे थे, तब उन्हें डीएनडी फ्लाईओवर पर हिरासत में ले लिया गया था। उन्होंने कहा कि यदि उस समय कांग्रेस नेताओं को पीड़ित परिवार के साथ खड़े होने से नहीं रोका जाता, तो शायद आज आरोपियों को इतनी राहत नहीं मिलती।

महिला कांग्रेस ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि डॉक्यूमेंट्री में सामने आए तथ्यों को आधार बनाकर मामले की निष्पक्ष पुनः जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


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