Greater Noida News (19 May 2026): अवार्ड की राशि का भुगतान लंबित रहने से नाराज ग्रेटर नोएडा माली एवं सफाई कामगार यूनियन ने 26 मई 2026 से नोएडा स्थित अपर श्रम आयुक्त कार्यालय के बाहर परिवार सहित अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन करने की घोषणा की है। यूनियन ने आरोप लगाया है कि न्यायालय के आदेश और प्राधिकरण द्वारा धनराशि जमा किए जाने के बावजूद श्रमिकों को उनका हक नहीं दिया जा रहा है।
ग्रेटर नोएडा माली एवं सफाई कामगार यूनियन, गौतमबुद्ध नगर, सीटू से संबद्ध संगठन ने मंगलवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि श्रमिक पिछले 25 वर्षों से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। यूनियन का कहना है कि माननीय औद्योगिक न्यायाधिकरण-5, मेरठ द्वारा 29 मई 2018 को ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के खिलाफ पारित अवार्ड को उच्चतम न्यायालय तक से वैध ठहराया जा चुका है। इसके तहत 31 जनवरी 2000 से 20 दिसंबर 2023 तक के वेतन और अन्य देयों की कुल 46 करोड़ 36 लाख 80 हजार रुपये की राशि प्राधिकरण द्वारा 7 अगस्त 2025 और 1 सितंबर 2025 को श्रम विभाग में जमा करा दी गई थी।
यूनियन के अनुसार, अवार्ड से जुड़े श्रमिकों ने 19 सितंबर 2025 को सभी आवश्यक दस्तावेज श्रम विभाग को उपलब्ध करा दिए थे, लेकिन आठ महीने बीत जाने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया। संगठन का आरोप है कि श्रम विभाग लगातार मामले को टालता रहा है। यूनियन ने बताया कि 25 मार्च 2026 को अपर श्रम आयुक्त के साथ हुई वार्ता में भुगतान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ। यूनियन नेताओं का कहना है कि 30 अप्रैल 2026 तक भुगतान किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में 4 मई को हुई बैठक में भी अधिकारियों ने भुगतान देने से इनकार कर दिया। श्रमिकों से स्टाम्प पेपर पर शपथ पत्र मांगे जा रहे हैं, जबकि पूरी राशि पहले से ही विभाग के खाते में जमा है।
प्रशासन के रवैये से नाराज यूनियन ने अब आंदोलन का रास्ता अपनाने का फैसला किया है। यूनियन ने घोषणा की है कि 26 मई से सेक्टर-3 स्थित अपर श्रम आयुक्त कार्यालय के बाहर मजदूर अपने परिवारों के साथ दिन-रात धरना देंगे। धरना स्थल पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भोजन की भी व्यवस्था की जाएगी। यूनियन ने मांग की है कि 26 मई से पहले सभी श्रमिकों को ब्याज सहित पूरी अवार्ड राशि का भुगतान किया जाए और न्यायालय के आदेश का पूर्ण रूप से पालन कराया जाए। साथ ही प्रशासन से धरना स्थल पर स्वच्छ पेयजल, शौचालय, टेंट और माइक जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।
यूनियन के महामंत्री रामकिशन ने कहा कि न्यायालय में जीत हासिल करने और धनराशि जमा होने के बावजूद भुगतान न होना श्रम विभाग की मजदूर विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि श्रमिकों को अपने परिवार सहित सड़क पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी श्रम विभाग और जिला प्रशासन की होगी। यूनियन की ओर से हेम सिंह, महेश कुमार, रामकिशन, इन्द्रपाल और फिरेशम को आंदोलन के प्रतिनिधि के रूप में चुना गया है। प्रेस विज्ञप्ति की प्रतिलिपि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव श्रम, श्रम आयुक्त कानपुर, जिलाधिकारी गौतमबुद्ध नगर और पुलिस आयुक्त समेत अन्य अधिकारियों को भी भेजी गई है।
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