पिता के निधन पर दिल्ली हाईकोर्ट ने इंजीनियर रसीद को दी अंतरिम जमानत

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (18 May 2026): दिल्ली हाईकोर्ट ने टेरर फंडिंग मामले में जेल में बंद बारामूला सांसद अब्दुल राशिद शेख उर्फ इंजीनियर रशीद को मानवीय आधार पर बड़ी राहत देते हुए 2 जून तक अंतरिम जमानत दे दी है। अदालत ने यह राहत उनके पिता के निधन के बाद दी ताकि वह अपने गृह क्षेत्र जाकर अंतिम संस्कार और पारंपरिक धार्मिक रस्मों में शामिल हो सकें। मामले की सुनवाई जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ ने की। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह अंतरिम जमानत केवल शोक और अंतिम संस्कार से जुड़ी आवश्यक रस्मों को पूरा करने के उद्देश्य से दी जा रही है।

सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी National Investigation Agency यानी एनआईए की ओर से पेश वकील अक्षय मलिक ने अदालत को बताया कि रशीद के पिता का निधन 17 और 18 मई की दरमियानी रात को हुआ था। इस तथ्य की पुष्टि होने के बाद अदालत ने संवेदनशील परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें अस्थायी राहत प्रदान की। अदालत ने माना कि किसी भी व्यक्ति को पारिवारिक शोक के समय अपने परिवार के साथ रहने और अंतिम संस्कार में शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए, भले ही वह गंभीर आरोपों का सामना कर रहा हो।

हालांकि अदालत ने रशीद की रिहाई के साथ बेहद सख्त शर्तें भी लगाई हैं। सात पन्नों के आदेश में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतरिम जमानत की पूरी अवधि के दौरान कम से कम दो सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी हर समय उनके साथ मौजूद रहेंगे। अदालत ने निर्देश दिया कि जेल से यात्रा शुरू होने से लेकर श्रीनगर से वापसी तक सुरक्षा अधिकारी लगातार उनकी निगरानी करेंगे। इसके अलावा रशीद को केवल कब्रिस्तान या धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़े चिन्हित स्थलों पर जाने की अनुमति दी गई है। अदालत ने साफ कहा कि निर्धारित स्थानों के अलावा उन्हें कहीं और जाने की इजाजत नहीं होगी।

गौरतलब है कि इंजीनियर रशीद पिछले छह वर्षों से अधिक समय से जेल में बंद हैं। उन्हें साल 2019 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। एनआईए का आरोप है कि वह जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों और आतंकी संगठनों को आर्थिक सहायता पहुंचाने से जुड़ी बड़ी साजिश का हिस्सा थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, टेरर फंडिंग नेटवर्क के जरिए घाटी में अशांति फैलाने और अलगाववादी संगठनों को समर्थन देने के लिए अवैध फंडिंग की जाती थी। इसी मामले में रशीद लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होते ही अब्दुल राशिद शेख को 2 जून को वापस जेल प्राधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा। अदालत के इस फैसले को एक ओर मानवीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा एजेंसियां भी पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं। अब इस मामले में आगे की सुनवाई और जांच प्रक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।


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