OLA-Uber से लेकर Swiggy-Blinkit तक सब ठप! रविवार को क्या होगा?

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (16 May 2026): देशभर में ऐप आधारित सेवाओं से जुड़े गिग वर्कर्स ने 17 मई, रविवार को 5 घंटे की हड़ताल का ऐलान किया है। इस हड़ताल का असर ओला-उबर, स्विगी-जोमैटो, रैपिडो, जेप्टो, ब्लिंकिट और अन्य डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर देखने को मिल सकता है। गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन के मुताबिक दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक सभी प्रमुख ऐप आधारित सेवाएं बंद रखी जाएंगी। ऐसे में वीकेंड पर बाहर जाने, खाना ऑर्डर करने या जरूरी सामान मंगाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खासकर महानगरों और बड़े शहरों में इसका असर ज्यादा देखने को मिलने की संभावना जताई जा रही है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी बनी हड़ताल की बड़ी वजह

गिग वर्कर्स का कहना है कि हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हुई है, जिससे उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ा है। डिलीवरी बॉय, कैब ड्राइवर और राइडर्स का आरोप है कि ईंधन महंगा होने के बावजूद कंपनियों ने उनके किराये और इंसेंटिव में कोई बढ़ोतरी नहीं की। यूनियन की अध्यक्ष सीमा सिंह ने मांग की है कि वर्कर्स के लिए कम से कम 20 रुपये प्रति किलोमीटर का न्यूनतम सर्विस रेट तय किया जाए। उनका कहना है कि लगातार बढ़ते खर्चों के बीच मौजूदा भुगतान व्यवस्था में काम करना मुश्किल होता जा रहा है और कंपनियों को तुरंत राहत पैकेज देना चाहिए।

ऑनलाइन ऑर्डर और कैब बुकिंग पर सीधा असर

हड़ताल के दौरान लोगों को कैब बुक करने में लंबा इंतजार करना पड़ सकता है, वहीं फूड और ग्रॉसरी डिलीवरी सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट और जेप्टो जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ऑर्डर लेट होने या अस्थायी रूप से बंद होने की आशंका है। इसके अलावा अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों की डिलीवरी सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है। रविवार होने के कारण बड़ी संख्या में लोग ऑनलाइन ऑर्डर और कैब सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं, ऐसे में यह हड़ताल आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। कई शहरों में पहले से ही ग्राहकों को एडवाइजरी जारी कर वैकल्पिक व्यवस्था रखने की सलाह दी जा रही है।

सम्मानजनक कमाई और सुरक्षा चाहिए

हड़ताल कर रहे गिग वर्कर्स का कहना है कि वे केवल किराया बढ़ाने की मांग नहीं कर रहे, बल्कि सामाजिक सुरक्षा और स्थायी नीतियों की भी मांग उठा रहे हैं। उनका कहना है कि ऐप आधारित कंपनियों के करोड़ों के कारोबार के बावजूद वर्कर्स को न्यूनतम आय की गारंटी नहीं मिलती। कई राइडर्स ने आरोप लगाया कि लंबे समय तक काम करने के बाद भी उनकी आय लगातार घट रही है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और कंपनियों ने उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन किया जा सकता है। इस हड़ताल को देश में तेजी से बढ़ती गिग इकॉनमी और उससे जुड़े श्रमिक अधिकारों की बड़ी लड़ाई के तौर पर देखा जा रहा है।


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