गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी फीस घोटाले में चार आरोपियों की अग्रिम जमानत खारिज
टेन न्यूज नेटवर्क
Greater Noida News (07/05/2026): गौतम बुद्ध नगर जिला अदालत ने गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी (GBU) में हुए करीब 5 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय घोटाले (Fee Scam) मामले में आज गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में चारों आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। इस फैसले के बाद आरोपियों को राहत नहीं मिली है और मामले की जांच आगे जारी रहेगी। यह आदेश अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (POCSO Act) अभिषेक पांडे की अदालत ने दिया। इस मामले में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय की तरफ से अधिवक्ता आदित्य भाटी ने पक्ष रखा।
क्या है पूरा मामला
9 अप्रैल 2026 को थाना इकोटेक-1, गौतम बुद्ध नगर में FIR दर्ज की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया है कि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) में छात्रों से ली गई फीस में बड़ी वित्तीय गड़बड़ी हुई है। आरोप है कि लगभग 5 करोड़ रुपये से अधिक की फीस राशि विश्वविद्यालय के बैंक खातों में जमा नहीं की गई। इसके बजाय फर्जी ट्रांजैक्शन आईडी और रसीदें बनाकर कंप्यूटर सिस्टम में गलत एंट्री दिखाई गई, ताकि लगे कि पैसा जमा हो चुका है।
मामले में आरोप है कि यह पूरी घटना एक संगठित साजिश का हिस्सा है, जिसमें छात्रों से ली गई फीस का गबन किया गया। फर्जी रसीदें और ट्रांजैक्शन आईडी बनाई गईं। असली पैसा बैंक खाते में जमा नहीं किया गया। लेखा विभाग और कुछ आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध रही। जरूरी वित्तीय रिकॉर्ड और CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
जांच समिति की रिपोर्ट
मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई गई थी, जिसकी अध्यक्षता पूर्व CBI अधिकारी एन.एम. सिंह ने की। समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्वविद्यालय में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं और प्रशासनिक लापरवाही हुई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर पुराने वर्षों की भी जांच हो, तो घोटाले की रकम और बढ़ सकती है।
आरोपी और उनकी दलील
इस मामले में चार आरोपी शैलेंद्र कुमार शर्मा, विजय प्रताप सिंह, मुकेश कुमार पांडेय और शिव कुमार खत्री ने अग्रिम जमानत की याचिका लगाई थी। आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है और उन्होंने किसी प्रकार का वित्तीय अपराध नहीं किया है। वहीं अभियोजन पक्ष ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मामला गंभीर आर्थिक अपराध, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ा है, इसलिए अग्रिम जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
अदालत का निर्णय
सभी पक्षों की दलीलें सुनने और केस रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अदालत ने कहा कि मामला गंभीर आर्थिक अपराध से जुड़ा है। अदालत ने यह भी माना कि सह-आरोपियों की अग्रिम जमानत पहले ही खारिज हो चुकी है और आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। इन्हीं आधारों पर अदालत ने चारों आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
GBU पक्ष की प्रतिक्रिया
इस मामले में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय की ओर से अधिवक्ता आदित्य भाटी ने पक्ष रखा। टेन न्यूज नेटवर्क से बातचीत में उन्होंने कहा कि अदालत का यह निर्णय मामले की गंभीरता को दर्शाता है और इससे जांच प्रक्रिया को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग कर रहा है। अदालत के आदेश के बाद चारों आरोपियों को अग्रिम राहत नहीं मिली है। मामले की जांच जारी है और आगे विधिक कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।।
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