एनसीईआरटी किताबों में मराठा साम्राज्य के नक्शे पर बवाल, बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा मामला

टेन न्यूज नेटवर्क

National News (07/05/2026): देश की स्कूली शिक्षा और इतिहास लेखन को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की सामाजिक विज्ञान की पुस्तकों से मराठा साम्राज्य (Maratha Empire) से जुड़े नक्शे और कुछ संदर्भ हटाए जाने के फैसले पर अब कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। महाराष्ट्र के शाही परिवारों के प्रतिनिधियों, इतिहास प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मराठा साम्राज्य केवल क्षेत्रीय शासन नहीं था, बल्कि भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण और गौरवशाली अध्याय रहा है। ऐसे में पाठ्यपुस्तकों (Textbooks) से उससे जुड़े नक्शों या जानकारियों को हटाना आने वाली पीढ़ियों को अधूरी ऐतिहासिक जानकारी देने जैसा होगा। उनका आरोप है कि यह फैसला बिना व्यापक ऐतिहासिक समीक्षा और विशेषज्ञों से सलाह लिए किया गया।

डिजिटल संस्करण में बदलाव के बाद बढ़ा विवाद

जानकारी के मुताबिक, विवाद तब गहराया जब कक्षा 8वीं की सामाजिक विज्ञान पुस्तक के डिजिटल संस्करण में मराठा साम्राज्य का नक्शा दिखाई नहीं दिया। इसके बाद इतिहासकारों और कई संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई। विरोध करने वालों का कहना है कि इतिहास को राजनीतिक या वैचारिक नजरिए से नहीं, बल्कि तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

याचिका में यह भी कहा गया है कि मराठा शासन ने भारतीय उपमहाद्वीप के बड़े हिस्से में अपना प्रभाव स्थापित किया था और मुगल साम्राज्य के कमजोर पड़ने के दौर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसलिए शिक्षा सामग्री से उसके प्रभाव को कम करके दिखाना ऐतिहासिक संतुलन के खिलाफ माना जा रहा है।

इतिहासकारों और शिक्षाविदों ने उठाए सवाल

इस मामले ने शिक्षा जगत में भी बहस छेड़ दी है। कई शिक्षाविदों का मानना है कि स्कूली किताबों में किसी भी ऐतिहासिक विषय को हटाने या संशोधित करने से पहले पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। उनका कहना है कि छात्रों को भारत के विविध और समृद्ध इतिहास की पूरी तस्वीर मिलनी चाहिए, ताकि वे अतीत को संतुलित दृष्टिकोण से समझ सकें।

कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इतिहास केवल घटनाओं का विवरण नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक चेतना का हिस्सा होता है। ऐसे में किसी प्रमुख साम्राज्य से जुड़े तथ्यों को कम महत्व देना व्यापक बहस का विषय बन सकता है।

कोर्ट की सुनवाई पर टिकी निगाहें

अब इस पूरे विवाद पर सभी की नजर बॉम्बे हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हुई है। अदालत यह तय करेगी कि एनसीईआरटी द्वारा किया गया बदलाव उचित प्रक्रिया के तहत हुआ या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि क्या छात्रों की पाठ्यपुस्तकों में मराठा साम्राज्य से जुड़ी सामग्री को दोबारा शामिल करने की जरूरत है। यह मामला केवल एक नक्शे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब यह इतिहास, शिक्षा नीति और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से जुड़ी बड़ी बहस का रूप ले चुका है।।


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