E20 विवाद में नितिन गडकरी को बड़ी राहत, बॉम्बे हाई कोर्ट ने फेक पोस्ट हटाने का दिया आदेश

टेन न्यूज नेटवर्क

National News (05 August 2026): E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे कथित फेक और भ्रामक प्रचार के मामले में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को बड़ी राहत मिली है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए सोशल मीडिया और इंटरनेट पर मौजूद गडकरी से जुड़े सभी आपत्तिजनक, फर्जी और मानहानिकारक पोस्ट, डीपफेक वीडियो, मॉर्फ्ड तस्वीरें और मीम्स को तत्काल हटाने का निर्देश दिया। अदालत ने पहली नजर में माना कि याचिका में उठाए गए आरोप गंभीर हैं और संबंधित सामग्री मंत्री की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली प्रतीत होती है।

सुनवाई के दौरान गडकरी की ओर से दायर 86 पन्नों की याचिका पर विचार करते हुए अदालत ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी व्यक्ति की छवि धूमिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। गडकरी ने मेटा, एक्स, गूगल, यूट्यूब, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) समेत कई पक्षों के खिलाफ 11 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग करते हुए मानहानि का मुकदमा दायर किया है। सुनवाई के दौरान गूगल और मेटा ने भी आपत्तिजनक सामग्री हटाने की सहमति जताई।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि भविष्य में इसी प्रकार का फर्जी या डीपफेक कंटेंट दोबारा प्रसारित होता है, तो याचिकाकर्ता सीधे संबंधित सोशल मीडिया कंपनियों से उसे हटाने का अनुरोध कर सकते हैं और कंपनियों को ऐसे अनुरोधों पर त्वरित कार्रवाई करनी होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि शिकायत के बावजूद एआई से तैयार किया गया आपत्तिजनक कंटेंट नहीं हटाया जाता है, तो पीड़ित पक्ष दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।

याचिका में नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया है कि E20 इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल योजना का संचालन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय करता है और सड़क परिवहन मंत्रालय का इससे कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर एक सुनियोजित अभियान चलाकर उन्हें E20 ईंधन से वाहनों को होने वाले कथित नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जबकि यह दावा पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन है।

अदालत ने बड़ी टेक कंपनियों को सलाह दी कि वे ऐसी शिकायतों के निस्तारण के लिए प्रभावी और तेज़ व्यवस्था विकसित करें, ताकि प्रभावित लोगों को हर बार न्यायालय की शरण न लेनी पड़े। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। इस बीच हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा और संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को विवादित सामग्री हटाने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।


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