ग्रैंड वेनिस मॉल प्रकरण में बड़ा एक्शन: सतेंद्र भसीन उर्फ मोंटू भसीन गिरफ्तार

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (03/05/2026): करीब एक दशक पुराने धोखाधड़ी मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्रेटर नोएडा स्थित ग्रैंड वेनिस मॉल के मालिक सतेंद्र भसीन उर्फ मोंटू भसीन को गिरफ्तार कर लिया। बीटा-2 कोतवाली पुलिस द्वारा की गई इस गिरफ्तारी के बाद आरोपी को सूरजपुर स्थित सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, वर्ष 2015 में दर्ज इस मामले की जांच लंबे समय से जारी थी। आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद वह अदालत में पेश नहीं हो रहा था। लगातार अनुपस्थिति के चलते पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी और आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

अभियोजन पक्ष ने अदालत को अवगत कराया कि 2 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की जमानत निरस्त करते हुए उसे एक सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि तय समयसीमा के भीतर सरेंडर नहीं करने पर उत्तर प्रदेश पुलिस उसे गिरफ्तार करने के लिए स्वतंत्र होगी।

इसके बावजूद आरोपी ने न तो खुद को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया और न ही 8 अप्रैल को समय बढ़ाने की याचिका खारिज होने के बाद कोई पहल की। इस अवमानना को देखते हुए पुलिस ने सख्त कदम उठाते हुए गिरफ्तारी की कार्रवाई की।

अभियोजन पक्ष का यह भी कहना है कि आरोपी ने विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं का सहारा लेकर मामले को लंबे समय तक लंबित रखने की कोशिश की। साथ ही उसके खिलाफ दर्ज अन्य आपराधिक मामलों की जानकारी भी अदालत से छिपाने का आरोप लगाया गया है।

ग्रैंड वेनिस परियोजना से जुड़े निवेशकों ने भसीन पर धन के दुरुपयोग, फंड डायवर्जन और आवंटन प्रक्रिया में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं। निवेशकों का दावा है कि परियोजना में पारदर्शिता की कमी के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता अमित चौहान ने पुलिस रिमांड की मांग का विरोध करते हुए कहा कि मामला लगभग 10 वर्ष पुराना है और इसकी जांच पूरी हो चुकी है। उन्होंने अदालत को बताया कि वर्ष 2019 में मुख्य चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जबकि 2022 और 2025 में पूरक चार्जशीट भी प्रस्तुत की गई हैं, जिससे सभी साक्ष्य पहले से ही न्यायालय के समक्ष उपलब्ध हैं।

बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि जब किसी प्रकार की बरामदगी शेष नहीं है, तब पुलिस हिरासत की मांग तर्कसंगत नहीं है। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से पूर्व में मिले अंतरिम संरक्षण और लगभग 50 करोड़ रुपये जमा कराने का भी उल्लेख किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। फिलहाल मामले की अगली सुनवाई और जांच की दिशा पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

इस मामले को लेकर टेन न्यूज नेटवर्क की टीम ने डीसीपी ग्रेटर नोएडा प्रवीण रंजन सिंह से बातचीत की, उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर एडिशनल सीपी (लॉ एंड ऑर्डर) मीडिया के समक्ष अपना बयान देंगे, लेकिन, खबर लिखे जाने तक एडिशनल सीपी राजीव नारायण मिश्र से संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है, उनका वक्तव्य मिलते ही खबर को अपडेट किया जाएगा।


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