भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) हस्ताक्षरित: EPCH ने ऐतिहासिक समझौते का स्वागत किया, हस्तशिल्प निर्यात के नए अवसर खुलेंगे
नई दिल्ली, 28 अप्रैल 2026 – भारत और न्यूज़ीलैंड ने भारत मंडपम, नई दिल्ली में एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए। समझौते पर हस्ताक्षर के उपरांत, भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने व्यापार एवं उद्योग निकायों, संघों, चैंबरों तथा निर्यात संवर्धन परिषदों (EPCs) के साथ एक उच्च स्तरीय संवाद आयोजित किया। इस अवसर पर एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स (EPCH) का प्रतिनिधित्व आर. के. पासी, पूर्व अध्यक्ष एवं प्रशासन समिति (CoA) के सदस्य; वरुण शर्मा, सदस्य, CoA; तथा राजेश रावत, कार्यकारी निदेशक द्वारा किया गया।
भारत–न्यूज़ीलैंड FTA द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो भारतीय निर्यात के लिए सभी टैरिफ लाइनों पर 100% शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करता है तथा निर्यात वृद्धि के व्यापक अवसर खोलता है। इस समझौते के अंतर्गत 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की परिकल्पना की गई है तथा भारतीय कुशल पेशेवरों एवं STEM स्नातकों के लिए प्रतिवर्ष 5,000 वीज़ा मार्गों की व्यवस्था की गई है, जिससे गतिशीलता एवं रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। यह श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे हस्तशिल्प, वस्त्र एवं चमड़ा उद्योग को विशेष प्रोत्साहन प्रदान करेगा तथा वस्तुओं, सेवाओं एवं निवेश को समाहित करने वाले व्यापक ढांचे के माध्यम से ओशिनिया क्षेत्र एवं प्रशांत द्वीप बाज़ारों तक भारत की पहुँच को सुदृढ़ करेगा।
कार्यवाही का प्रारंभ एक बिज़नेस फोरम से हुआ, जिसमें भारत एवं न्यूज़ीलैंड दोनों ने समझौते के प्रमुख स्तंभों पर अपने विचार साझा किए। इस सत्र की सह-अध्यक्षता माननीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा न्यूज़ीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने की। इसके उपरांत माननीय मंत्री एवं EPCs के प्रतिनिधियों के बीच एक-से-एक संवाद आयोजित हुआ। इस दौरान EPCH ने ऊर्जा एवं गैस आपूर्ति की बाधाएं, रेट्रोस्पेक्टिव इमरजेंसी कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज (ECS), MEIS स्क्रिप मूल्यों में वास्तविक पात्रता के सापेक्ष विसंगतियां, TRACE योजना के अंतर्गत VRIKSH को शामिल करने की आवश्यकता, तथा ECGC प्रीमियम एवं अन्य मुद्दों पर समर्थन जैसे महत्वपूर्ण विषय उठाए।
इस ऐतिहासिक समझौते का स्वागत करते हुए, ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने भारत–न्यूज़ीलैंड FTA को भारत की वैश्विक व्यापार यात्रा में एक निर्णायक उपलब्धि बताया। उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और कहा कि यह समझौता निर्यात अवसरों को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएगा, रोजगार सृजन करेगा तथा ओशिनिया क्षेत्र में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करेगा।
ईपीसीएच के उपाध्यक्ष सागर मेहता ने कहा कि यह समझौता भारत के निर्यात विकास पथ में एक नए चरण का प्रतीक है, जो विशेष रूप से हस्तशिल्प जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में उत्पादन विस्तार एवं रोजगार सृजन के अवसर प्रदान करेगा।
ईपीसीएच में मुख्य मार्गदर्शक की भूमिका में महानिदेशक डॉ. राकेश कुमार ने इस समझौते को भारत की वैश्विक व्यापार में एक महत्वपूर्ण छलांग बताया और कहा कि इससे भारत एक विश्वसनीय वैश्विक व्यापार भागीदार के रूप में और सुदृढ़ होगा, साथ ही भारतीय हस्तशिल्प की वैश्विक मांग में वृद्धि होगी।
समग्र रूप से, भारत–न्यूज़ीलैंड FTA से द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में उल्लेखनीय मजबूती आने की अपेक्षा है तथा यह विशेष रूप से हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए निर्यात-प्रेरित वृद्धि को गति देगा, जिससे वैश्विक मांग में वृद्धि और कारीगरों के आजीविका को समर्थन मिलेगा।
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