5 करोड़ के घोटाले में बड़ी कार्रवाई: गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के पूर्व रजिस्ट्रार की अग्रिम जमानत खारिज
टेन न्यूज नेटवर्क
Greater Noida News (28/04/2026): गौतम बुद्ध नगर की अदालत ने बहुचर्चित गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी (GBU) वित्तीय घोटाले मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. विश्वाश त्रिपाठी (Dr. Vishwas Tripathi) की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (POCSO Act) अभिषेक पांडे (Abhishek Pandey) की अदालत द्वारा पारित किया गया। आपको बता दे कि इस मामले में एडवोकेट आदित्य भाटी द्वारा गौतमबुद्ध विश्विद्यालय का पक्ष रखा गया।
मामले के अनुसार, इकोटेक-1 (Ecotech-1) थाने में दर्ज एफआईआर (FIR) में आरोप है कि विश्वविद्यालय के अकाउंट्स सेक्शन (Accounts Section) में कार्यरत कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर छात्रों द्वारा जमा की गई फीस (Fees) का बड़ा हिस्सा गबन (Embezzlement) किया गया। जांच में सामने आया कि करीब 5 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को सॉफ्टवेयर में दर्ज तो किया गया, लेकिन वास्तविक रूप से विश्वविद्यालय के बैंक खातों (Bank Accounts) में जमा नहीं कराया गया।
अदालत में प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, डॉ. त्रिपाठी उस समय रजिस्ट्रार और डीडीओ (Drawing and Disbursing Officer – DDO) के पद पर थे और वित्तीय प्रक्रियाओं की निगरानी की जिम्मेदारी उन्हीं के पास थी। उन पर आरोप है कि उन्होंने बैंक खातों के मिलान (Reconciliation) की प्रक्रिया की अनदेखी की और सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) भी उपलब्ध नहीं कराई, जिससे साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ (Tampering of Evidence) की आशंका बनी।
जांच समिति की रिपोर्ट में प्रशासनिक लापरवाही (Administrative Lapses) और आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) के संकेत पाए गए हैं। अदालत ने यह भी माना कि मामला गंभीर आर्थिक अपराध (Economic Offence) की श्रेणी में आता है और प्रथम दृष्टया (Prima Facie) आरोपों में पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है और उसका कोई आपराधिक इतिहास (Criminal Record) नहीं है। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने इन तर्कों का विरोध करते हुए मामले की गंभीरता को रेखांकित किया।
सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही अंतरिम आदेश (Interim Relief) भी समाप्त कर दिया गया है।
इस फैसले के बाद अब पुलिस द्वारा आगे की कार्रवाई तेज होने की संभावना है और इस मामले को लेकर जो भी पुलिस की तरफ से अपडेट सामने आता है, वह खबर में अपडेट किया जाएगा।
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