JNU में ‘वार्ड कोटा’ पर बढ़ा विवाद, शिक्षक संघ क्यों कर रहा विरोध?

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (22 अप्रैल 2026): नई दिल्ली स्थित जेएनयू में ‘वार्ड कोटा’ को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा शिक्षकों के बच्चों के लिए प्रस्तावित 5 प्रतिशत सुपरन्यूमरेरी कोटा के खिलाफ शिक्षक संघ ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। Jawaharlal Nehru University Teachers Association ने अपनी जनरल बॉडी मीटिंग में इस फैसले को पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यह निर्णय विश्वविद्यालय की समावेशी और समान अवसर वाली प्रवेश नीति के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।

JNUTA का तर्क है कि जेएनयू की पहचान हमेशा सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों को अवसर देने वाली संस्था के रूप में रही है। ऐसे में शिक्षकों के बच्चों के लिए विशेष कोटा लागू करना संस्थान की उस छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। शिक्षक संघ का कहना है कि उन्होंने कभी भी इस तरह के कोटे की मांग नहीं की, और प्रशासन द्वारा इसे लागू करना एकतरफा और अनुचित निर्णय है। उनका आरोप है कि यह कदम विश्वविद्यालय में समानता के सिद्धांत को कमजोर कर सकता है।

प्रस्तावित ‘सुपरन्यूमरेरी कोटा’ के तहत मौजूदा सीटों के अतिरिक्त 5 प्रतिशत सीटें शिक्षकों के बच्चों के लिए जोड़ी जाएंगी। प्रशासन का कहना है कि इससे सामान्य छात्रों की सीटों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन छात्रों और शिक्षकों का मानना है कि इससे कैंपस संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव जरूर बढ़ेगा। हॉस्टल, लाइब्रेरी और अन्य सुविधाओं पर भार बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे समग्र शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हो सकता है।

शिक्षक संघ ने कुलपति शांतिश्री धूलिपादि पंडित पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यह निर्णय बिना व्यापक परामर्श के लिया गया है और इसमें पारदर्शिता की कमी है। संगठन ने इसे प्रशासनिक शक्ति के दुरुपयोग का उदाहरण बताया है। साथ ही, उन्होंने विश्वविद्यालय में पहले से लागू ‘डिप्रिवेशन पॉइंट सिस्टम’ को मजबूत करने की मांग की है, जिसे वे सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को संतुलित करने का प्रभावी माध्यम मानते हैं।

इसके अलावा, JNUTA ने गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बच्चों के लिए पहले से मौजूद सीमित कोटे के महत्व को भी रेखांकित किया है। उनका कहना है कि यह व्यवस्था वास्तव में जरूरतमंद वर्गों को अवसर देने के उद्देश्य से बनाई गई थी। ऐसे में शिक्षकों के बच्चों के लिए नया कोटा लाना इस संतुलन को बिगाड़ सकता है। संगठन ने इंजीनियरिंग स्कूल में महिला छात्रों के लिए प्रस्तावित 11 प्रतिशत सुपरन्यूमरेरी सीटों पर भी सवाल उठाए हैं और इसे नीति में असंगति का उदाहरण बताया है।

विवाद को लेकर शिक्षक संघ अब इस मुद्दे को विश्वविद्यालय के विजिटर यानी राष्ट्रपति और शिक्षा मंत्रालय के समक्ष उठाने की तैयारी में है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि संस्थागत पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। JNUTA ने प्रशासन से अपील की है कि वह कोटा जैसे विवादास्पद फैसलों के बजाय भर्ती, प्रमोशन और कैंपस सुविधाओं जैसे वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करे, ताकि विश्वविद्यालय की साख और गुणवत्ता बरकरार रह सके।


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