100 वर्ष पूर्ण होने पर YSS के नोएडा आश्रम में भक्ति‍मय कीर्तन व ध्यान कार्यक्रम आयोजित

टेन न्यूज नेटवर्क

Noida News (19/04/2026): एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक क्षण के 100 वर्ष पूर्ण होने पर, योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (YSS) के नोएडा आश्रम में भक्ति‍मय कीर्तन और ध्यान की एक अत्यंत प्रेरणादायक संध्या आयोजित हुई, जिसमें हज़ारों प्रतिभागियों ने शांति और आंतरिक उत्थान के शक्तिशाली सामूहिक अनुभव में भाग लिया।

यह कार्यक्रम 18 अप्रैल 1926 की ऐतिहासिक संध्या को स्मरण कराता है, जब परमहंस योगानन्द ने न्यूयॉर्क के कार्नेगी हॉल में पश्चिमी जगत के सामने भक्ति‍मय कीर्तन का परिचय कराया था। 2,800 सीटों वाला वह हॉल खचाखच भरा था और हज़ारों लोग “ओ गॉड ब्यूटीफुल” (O God Beautiful) के कीर्तन में सम्मिलित हुए थे, जिससे गहन आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हुआ, जो उनके मंच छोड़ने के बाद भी लंबे समय तक बना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए स्वामी स्मरणानन्द (अंग्रेज़ी में) और स्वामी अद्यानन्द (हिन्दी में) ने इस शताब्दी के गहरे महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। स्वामी स्मरणानन्द ने बल दिया कि “आत्म-शक्ति से परिपूर्ण संगीत ही वास्तविक विश्वव्यापी संगीत है, जिसे सभी हृदय समझ सकते हैं,” इस प्रकार भक्ति‍मय कीर्तन की सार्वभौमिकता को परमात्मा तक पहुँचने के प्रत्यक्ष मार्ग के रूप में रेखांकित किया।

उन्होंने आगे समझाया कि भक्ति‍मय कीर्तन केवल एक संगीतमय अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक आध्यात्मिक अभ्यास है। योगानन्द जी की शिक्षाओं के अनुसार, यह मन को एकाग्र करता है, भक्ति जागृत करता है और चेतना को अंतर्मुखी बनाता है। उन्होंने कहा कि कीर्तन ध्यान में “आधी लड़ाई जीतने” के समान है, क्योंकि यह साधक को शीघ्र ही गहन जागरूकता और आंतरिक शांति की अवस्था में ले जाता है।

योगानन्द की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि भक्ति‍मय कीर्तन—

*चेतना का उत्थान करता है और भक्ति को जागृत करता है।
*लय और राग के माध्यम से एकाग्रता को सशक्त बनाता है।
*चिंता, भय और बेचैनी को दूर करने में सहायक है।
*गहरे ध्यान और आंतरिक निश्चलता का मार्ग प्रशस्त करता है, तथा स्पंदनों की शक्ति से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर परिवर्तन ला सकता है।

संध्या का मुख्य आकर्षण ब्रह्मचारी भास्करानन्द के नेतृत्व में संन्यासियों के साथ एक तल्लीन कर देने वाला भक्ति‍मय कीर्तन सत्र रहा। पवित्र कीर्तन “ओ गॉड ब्यूटीफुल” से आरंभ होकर यह सत्र अंग्रेज़ी और हिन्दी में कॉस्मिक चैंट्स की शृंखला के माध्यम से आगे बढ़ा, जिसमें बीच-बीच में ध्यानमय विराम भी शामिल थे।

जैसे ही अनेक स्वर एक साथ गूंजे, वातावरण भक्ति की गहराई से ओतप्रोत हो गया। अनेक प्रतिभागियों ने आंतरिक निश्चलता, भावनात्मक मुक्ति और आध्यात्मिक उत्थान का अनुभव किया—जो 1926 की मूल घटना की प्रतिध्वनि जैसा था, जब उपस्थित लोगों ने ईश्वर-साक्षात्कार तथा शरीर, मन और आत्मा की चंगाई का अनुभव किया था।

स्वामी स्मरणानन्द ने यह भी कहा कि भक्ति‍मय कीर्तन एक ऐसी कला है, जिसमें निष्ठा, भावना और आंतरिक तल्लीनता आवश्यक है। सच्चा कीर्तन शब्दों और ध्वनि से परे जाकर साधक को परमात्मा से जोड़ देता है।

कार्यक्रम का समापन स्वामी अद्यानन्द के संक्षिप्त संबोधन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने उपस्थित जनों को वाईएसएस (YSS) की शिक्षाओं के गहन अध्ययन के लिए प्रेरित किया। इन शिक्षाओं में राजयोग का मार्ग शामिल है, जो भक्ति, ध्यान और संतुलित जीवन का समन्वय प्रस्तुत करता है।

विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। यह नोएडा सभा एक वैश्विक शताब्दी समारोह रहा।।


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