मजदूरों की गिरफ्तारी के विरोध में किसानों का प्रदर्शन, रिहाई की उठी मांग
टेन न्यूज नेटवर्क
Greater Noida News (17/04/2026): गौतमबुद्ध नगर में मजदूरों की कथित अवैध गिरफ्तारी के विरोध में किसान संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर सभी बंद मजदूरों की बिना शर्त रिहाई की मांग उठाई। किसान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले किसान सभा, किसान परिषद और किसान एकता संघ के सैकड़ों कार्यकर्ता इस विरोध कार्यक्रम में शामिल हुए।
प्रदर्शन से पहले किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा को उनके जेपी ग्रींस स्थित आवास पर ही पुलिस ने रोक लिया। उनके साथ पूर्व जिला बार एसोसिएशन अध्यक्ष उमेश भाटी को भी बाहर निकलने से रोक दिया गया। मौके पर डीसीपी प्रवीन रंजन, एडीसीपी सुधीर कुमार, एसीपी और थाना बीटा-2 पुलिस बल के साथ तैनात रहे।
जैसे ही यह सूचना अन्य किसान संगठनों तक पहुंची, बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जेपी ग्रींस की ओर पहुंचने लगे। हालांकि नर्मदा गेट पर पुलिस ने उन्हें सोसाइटी के भीतर प्रवेश नहीं करने दिया, जिसके चलते वहां मौजूद किसानों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक, नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन देखने को मिला।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. रुपेश वर्मा ने आरोप लगाया कि करीब 1200 मजदूरों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत जेल भेजा गया है, जबकि यह धारा केवल एहतियाती कार्रवाई के लिए होती है और इसके तहत किसी को 24 घंटे से अधिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा अरेस्ट मेमो सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं, जिससे मजदूरों को कानूनी मदद और जमानत मिलने में दिक्कत हो रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि गिरफ्तार मजदूरों के परिजन आर्थिक रूप से कमजोर हैं और अपने परिवार के सदस्यों की जानकारी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं, जो कानून के दुरुपयोग और मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का संकेत है। पूर्व बार अध्यक्ष उमेश भाटी ने भी इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि अधिवक्ता समाज मजदूरों के साथ खड़ा है और किसी भी तरह की पुलिसिया ज्यादती को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
किसान परिषद के नेता उदल आर्य ने पुलिस के रवैये को तानाशाहीपूर्ण बताते हुए कहा कि जिले में आपातकाल जैसे हालात बनाए जा रहे हैं और किसानों-मजदूरों की जायज मांगों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
वहीं किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरन प्रधान ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और ज्ञापन देना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन यहां इन अधिकारों को सीमित किया जा रहा है। उन्होंने किसानों से जुड़े मुद्दों—जैसे 10 प्रतिशत प्लॉट, आबादी और नए कानूनों के क्रियान्वयन—के लंबित होने पर भी चिंता जताई।
किसान सभा के संयोजक वीर सिंह नागर ने आरोप लगाया कि कई किसान नेताओं को गैरकानूनी तरीके से नजरबंद किया गया है, जबकि कानून में इस प्रकार की कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। किसान संगठनों ने एकजुट होकर पुलिस की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की और सभी निर्दोष मजदूरों को तुरंत रिहा करने की मांग दोहराई। इस दौरान अशोक भाटी, सुरेंद्र भाटी, देशराज चौहान, नितिन चौहान, सुरेंद्र सिंह पुंडीर, बाबा करतार, नरेश नगर, राहुल नगर, दिनेश शर्मा, मुकुल यादव, बुधपाल यादव, संदीप भाटी, अजय पाल भाटी, गुरप्रीत एडवोकेट, जयप्रकाश आर्य समेत सैकड़ों किसान मौजूद रहे।
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