Aarya Fashions की पहल से गांव की महिलाओं को मिला रोजगार, हुनर बना आत्मनिर्भरता का आधार

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (13/04/2026): महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल आधारित रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में आर्या फैशन्स द्वारा हापुड़ जिले के सलाई गांव में एक विशेष “महिला कौशल प्रशिक्षण शिविर” का आयोजन किया। इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और हस्तनिर्मित ज्वैलरी बनाने की बारीकियों को सीखा।

कार्यक्रम में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के अंतर्गत एमएसएमई-डीआई के निदेशक डॉ. आर.के. भारती मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं गौतमबुद्ध नगर की जिला रोजगार अधिकारी मनीषा अत्री भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। कार्यक्रम का संचालन और नेतृत्व आर्या फैशन्स की संस्थापक एवं इंडियन बिजनेस एसोसिएशन (IBA) की उपाध्यक्ष डॉ. खुशबू सिंह ने किया।

इस प्रशिक्षण शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को कौशल प्रदान कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। शिविर में महिलाओं को हस्तनिर्मित ज्वैलरी बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण, कौशल विकास सत्र, मार्गदर्शन और प्रेरणादायी वक्तव्यों के माध्यम से उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया गया साथ ही उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने की पहल भी की गई।

इस अवसर पर डॉ. खुशबू सिंह ने टेन न्यूज नेटवर्क से बातचीत में कहा कि जब एक महिला आगे बढ़ती है तो केवल उसका जीवन ही नहीं बल्कि पूरा परिवार और समाज आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में अपार प्रतिभा और हुनर होता है, बस उन्हें सही अवसर और मंच की आवश्यकता होती है। आगे उन्होंने कहा, हमारा प्रयास है कि गांवों में रहने वाली महिलाएं अपने हुनर के दम पर आर्थिक रूप से मजबूत बनें। आर्या फैशन्स पिछले कई वर्षों से महिलाओं को हस्तशिल्प और ज्वैलरी निर्माण का प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ने का काम कर रहा है। आज हमारी ज्वैलरी देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बहुत बड़ी मात्रा में भेजी जाती है, और उसके पीछे इन ग्रामीण महिलाओं की मेहनत और समर्पण छिपा है। हमें गर्व है कि हम इन मेहनतकश हाथों को दुनिया के सामने ला पा रहे हैं।

आगे डॉ. खुशबू सिंह ने यह भी बताया कि, सरकार द्वारा महिलाओं के कौशल विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है, लेकिन आर्या फैशन्स लंबे समय से इस दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि, उनका उद्देश्य केवल रोजगार देना ही नहीं बल्कि महिलाओं को उद्यमिता के लिए भी प्रेरित करना है।

साथ ही डॉ. खुशबू सिंह ने कहा कि, उनकी संस्था में बाल श्रम का किसी भी तरह से कोई स्थान नहीं है और इस विषय में पूरी तरह सख्ती और पारदर्शिता बरती जाती है। उन्होंने बताया कि यहां केवल वयस्क महिलाएं ही काम करती हैं और उनकी मेहनत से तैयार होने वाली ज्वैलरी देश-विदेश तक पहुंचती है। इन महिलाओं के पास बेहतरीन हुनर और हाथों की अद्भुत कारीगरी है। भले ही वे मंच पर अपनी बात कहने में थोड़ी संकोच महसूस करें, लेकिन उनके काम और मेहनत में उनकी लगन और प्रतिभा साफ दिखाई देती है।

मुख्य अतिथि डॉ. आर.के. भारती ने टेन न्यूज नेटवर्क से बातचीत में इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि, सूक्ष्म और लघु उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ग्रामीण स्तर पर इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं के लिए नए अवसर खोलते हैं।

उन्होंने कहा, ग्रामीण क्षेत्रों में माइक्रो लेवल पर होने वाला काम इंडस्ट्री की असली ताकत है। यहां जो महिलाएं प्रशिक्षण ले रही हैं, वे भविष्य में खुद का छोटा उद्योग या व्यवसाय भी शुरू कर सकती हैं। अगर इन्हें सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिले तो ये महिलाएं सफल उद्यमी बन सकती हैं। ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का काम करते हैं।

इस दौरान जिला रोजगार अधिकारी मनीषा अत्री ने कहा कि, ग्रामीण महिलाओं के लिए शहर जाकर रोजगार करना कई बार कठिन होता है, इसलिए इस तरह की पहल बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा, डॉ. खुशबू आर्या ने वास्तव में रोजगार को इन महिलाओं के घर तक पहुंचाने का काम किया है। यह प्रधानमंत्री की उस सोच के अनुरूप है जिसमें हर व्यक्ति तक स्वरोजगार के अवसर पहुंचाने की बात कही गई है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं, तो समाज और देश दोनों मजबूत होते हैं। भविष्य में ये महिलाएं स्वयं उद्यमिता की दिशा में भी कदम बढ़ा सकती हैं।

शिविर में प्रशिक्षण ले रही महिलाओं ने भी अपने अनुभव साझा किए। गांव की महिला रानी ने टेन न्यूज नेटवर्क से बातचीत में बताया कि, वह कई वर्षों से इस काम से जुड़ी हैं और इससे उन्हें आर्थिक सहयोग मिलने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा है। वहीं रुकैया ने बताया कि, इस काम से उन्हें नियमित आय मिलती है और भुगतान भी समय पर मिलता है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है।

मुस्कान, जो पिछले दो से तीन वर्षों से ज्वैलरी निर्माण से जुड़ी हैं, उन्होंने कहा कि शुरुआत में काम सीखना थोड़ा कठिन था, लेकिन धीरे-धीरे अभ्यास के साथ उन्होंने नेकलेस, ब्रेसलेट और ईयररिंग्स जैसे कई उत्पाद बनाना सीख लिया। उन्होंने कहा, पहले हमें इतना अनुभव नहीं था, लेकिन अब हम आसानी से अलग-अलग तरह की ज्वैलरी बना लेते हैं। इससे हमें घर बैठे काम भी मिल जाता है और परिवार की मदद भी हो जाती है।

सलाई गांव में आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर ने यह साबित कर दिया कि, यदि महिलाओं को सही प्रशिक्षण और अवसर मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं। ग्रामीण महिलाओं द्वारा बनाई गई ज्वैलरी आज अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच रही है, जो उनके हुनर और मेहनत का प्रमाण है।

आर्या फैशन्स की यह पहल न केवल महिलाओं को रोजगार दे रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक मजबूत कदम भी साबित हो रही है। यदि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार आयोजित किए जाएं तो महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ देश के विकास में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित होगा।।


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