विश्व होम्योपैथी दिवस: बैक्सन कॉलेज के विशेषज्ञों ने होम्योपैथी के विकास और भविष्य पर किया मंथन
टेन न्यूज नेटवर्क
National News (10/04/2026): विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर ग्रेटर नोएडा स्थित बैक्सन होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्रोफेसर (डॉ.) कथिका चट्टोपाध्याय, डॉ. निशा रानी, प्रोफेसर (डॉ.) निमेश कुमार और प्रोफेसर (डॉ.) अश्विनी नायर ने होम्योपैथी की वर्तमान स्थिति, वैज्ञानिक विकास और भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। सभी विशेषज्ञों ने अपने-अपने क्षेत्रों के अनुभवों के आधार पर चिकित्सा पद्धति के बदलते स्वरूप पर विस्तार से चर्चा की।
प्रोफेसर (डॉ.) कथिका चट्टोपाध्याय पीएचडी (होम्योपैथी), एमएससी (क्लिनिकल साइकोलॉजी) एचओडी, मनोचिकित्सा एवं प्रमुख, अनुसंधान एवं विकास सेल
प्रोफेसर डॉ. कथिका चट्टोपाध्याय ने कहा कि होम्योपैथी की शुरुआत जर्मन चिकित्सक डॉ. सैमुअल हेनमैन द्वारा की गई थी और आज यह पद्धति भारत में एक मजबूत शैक्षणिक और चिकित्सा प्रणाली के रूप में स्थापित हो चुकी है। उन्होंने बताया कि भारत में होम्योपैथी केवल एक उपचार पद्धति नहीं, बल्कि एक संगठित शिक्षा प्रणाली बन चुकी है, जिसमें BHMS से लेकर PhD तक के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।
उन्होंने आगे कहा कि नीति सुधार, डिजिटल शिक्षा और अनुसंधान के माध्यम से होम्योपैथी को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़ा जा रहा है, जिससे यह वैश्विक स्तर पर भारत को एक अग्रणी केंद्र बनाता है।

डॉ. निशा रानी, सह-प्रोफेसर, पैथोलॉजी
डॉ. निशा रानी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय होम्योपैथी अब पारंपरिक ज्ञान से आगे बढ़कर वैज्ञानिक आधार पर विकसित हो रही है। उन्होंने बताया कि पैथोलॉजी इस प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, क्योंकि रक्त परीक्षण, मूत्र जांच और हार्मोनल विश्लेषण जैसे आधुनिक परीक्षण रोगों के सटीक निदान में मदद करते हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि एनीमिया, थायरॉइड, यूरिन इन्फेक्शन और प्रीडायबिटीज जैसी बीमारियों में होम्योपैथिक उपचार के साथ लैब रिपोर्ट्स के आधार पर बेहतर परिणाम देखने को मिल रहे हैं।

प्रोफेसर (डॉ.) निमेश कुमार, एमडी (होम्योपैथी), विभागाध्यक्ष, सामुदायिक चिकित्सा विभाग
प्रोफेसर डॉ. निमेश कुमार ने कहा कि होम्योपैथी भारत में एक सस्ती, सुरक्षित और सुलभ चिकित्सा प्रणाली के रूप में व्यापक रूप से स्वीकार की जाती है। उन्होंने बताया कि “Similia Similibus Curentur” सिद्धांत पर आधारित यह पद्धति विशेष रूप से दीर्घकालिक रोगों में उपयोगी है।
उन्होंने यह भी कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसे और मजबूत बनाने के लिए शोध, इंटीग्रेटिव मेडिसिन और डिजिटल तकनीकों पर काम किया जा रहा है।

प्रोफेसर (डॉ.) अश्विनी नायर, विभागाध्यक्ष, होम्योपैथिक मटीरिया मेडिका, स्नातकोत्तर प्रभारी
प्रोफेसर डॉ. अश्विनी नायर ने शल्य चिकित्सा स्थितियों में होम्योपैथी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह सर्जरी का विकल्प नहीं, बल्कि सहायक प्रणाली है। उन्होंने बताया कि सर्जरी से पहले और बाद में मरीज की रिकवरी, दर्द प्रबंधन और घाव भरने में होम्योपैथी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंभीर और आपातकालीन स्थितियों में सर्जरी अनिवार्य होती है।

विशेषज्ञों के विचारों से स्पष्ट है कि भारत में होम्योपैथी तेजी से पारंपरिक चिकित्सा से आगे बढ़कर एक वैज्ञानिक और संरचित प्रणाली का रूप ले रही है। आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और समन्वित दृष्टिकोण के साथ यह प्रणाली भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है।।
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