न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग तेज, ₹26,000 मासिक वेतन की अधिसूचना जारी करने की मांग
टेन न्यूज नेटवर्क
Greater Noida News (10/04/2026): सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) की गौतमबुद्ध नगर इकाई ने उत्तर प्रदेश सरकार से मजदूरों के न्यूनतम वेतन में तत्काल बढ़ोतरी करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि प्रदेश में न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर ₹26,000 प्रतिमाह किया जाए और इसके लिए सरकार जल्द अधिसूचना जारी करे। सीटू ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार मजदूरों की इस मांग पर शीघ्र निर्णय नहीं लेती है तो औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक असंतोष बढ़ सकता है और संगठन प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करने को मजबूर होगा।
सीटू ने आरोप लगाया कि वेतन वृद्धि की मांग को लेकर नोएडा, गुरुग्राम और मानेसर में चल रहे मजदूर आंदोलनों के बीच प्रशासन द्वारा दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है। संगठन के अनुसार 9 अप्रैल को रिचा एक्सपोर्ट कंपनी, होजरी कॉम्प्लेक्स फेज-2, नोएडा के कर्मचारियों ने वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर हड़ताल शुरू कर दी। आंदोलन कर रहे मजदूरों के समर्थन में सीटू नेताओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए नोएडा पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की।
सीटू का आरोप है कि जिला सचिव गंगेश्वर दत्त शर्मा को 9 अप्रैल की रात करीब 2 बजे उनके घर में ही नजरबंद कर दिया गया, ताकि वे आंदोलनकारी मजदूरों से संपर्क न कर सकें। वहीं संगठन के जिला महासचिव रामस्वारथ को थाना फेस-1 पुलिस ने हिरासत में लेकर पुलिस चौकी झुंडपुरा में बैठा रखा है। सीटू ने इसे मजदूर आंदोलन को दबाने की कोशिश बताते हुए दोनों नेताओं को तत्काल रिहा करने की मांग की है।
इसी के साथ सीटू ने हरियाणा के गुरुग्राम में वेतन वृद्धि को लेकर शांतिपूर्ण हड़ताल कर रहे मजदूरों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज की भी कड़ी निंदा की है। संगठन का कहना है कि मजदूर कई दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठा रहे थे, लेकिन प्रशासन ने बल प्रयोग कर स्थिति को और गंभीर बना दिया।
सीटू के जिला सचिव गंगेश्वर दत्त शर्मा ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई के कारण मजदूरों का जीवन बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने बताया कि पहले जो गैस सिलेंडर 80 से 90 रुपये में मिलता था, उसकी कीमत अब 400 से 500 रुपये तक पहुंच गई है। इसके अलावा खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम भी तेजी से बढ़े हैं। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में मजदूरों का न्यूनतम वेतन करीब ₹11,000 प्रतिमाह ही है, जो वर्तमान परिस्थितियों में परिवार चलाने के लिए बेहद कम है।
उन्होंने बताया कि ठेका श्रमिकों की स्थिति और भी खराब है। अधिकांश ठेका मजदूरों को न्यूनतम वेतन भी नहीं मिलता और 12-12 घंटे काम करने के बाद उन्हें मुश्किल से ₹10,000 से ₹12,000 तक का भुगतान किया जाता है। इसके अलावा ओवरटाइम का उचित भुगतान, सुरक्षा सुविधाएं और स्थायी रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उन्हें नहीं मिलतीं।
सीटू ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं। संगठन ने कहा कि मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन ₹26,000 प्रतिमाह घोषित किया जाए और इसकी अधिसूचना तुरंत जारी की जाए। इसके साथ ही सभी श्रमिकों को सरकारी दरों पर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान सुनिश्चित करने, ईएसआई और पीएफ जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ देने और ठेका प्रथा को समाप्त कर श्रमिकों का स्थायीकरण करने की मांग भी की गई है।
सीटू ने यह भी कहा कि गिरफ्तार किए गए संगठन के नेताओं को तत्काल रिहा किया जाए और आंदोलन कर रहे मजदूरों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई बंद की जाए। गंगेश्वर दत्त शर्मा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार मजदूरों की समस्याओं को नजरअंदाज करती रही तो औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक असंतोष बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए सीटू सड़क से लेकर संसद तक व्यापक आंदोलन चलाने के लिए तैयार है।
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