Noida News (03/04/2026): नोएडा क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजा वितरण में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। राज्य सरकार ने इस रिपोर्ट को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर दिया। साथ ही सरकार ने अदालत से जांच प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए दो माह का अतिरिक्त समय देने का अनुरोध भी किया है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान ऐसे कई मामलों की पड़ताल की गई, जिनमें जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों और भूमि स्वामियों को निर्धारित मानकों से अधिक मुआवजा दिए जाने का आरोप था। एसआईटी ने अपनी जांच में कुल 20 ऐसे मामलों की पहचान की है, जहां भुगतान तय सीमा से अधिक पाया गया।
जांच के दायरे में नोएडा प्राधिकरण के पूर्व अधिकारियों की भूमिका भी सामने आई। एसआईटी ने इस मामले में प्राधिकरण के 12 पूर्व अधिकारियों को जांच के दायरे में लेते हुए उनसे पूछताछ की। उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि इन 12 अधिकारियों में से एक अधिकारी का निधन हो चुका है, जबकि शेष 11 अधिकारियों से टीम ने विस्तृत पूछताछ की है। यह पूरी प्रक्रिया लगभग तीन सप्ताह तक चली।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण द्वारा भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजे के भुगतान में कथित गड़बड़ियों के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था। अदालत ने जांच के लिए कुछ प्रमुख बिंदु तय किए थे। इनमें यह स्पष्ट करना शामिल था कि क्या जमीन मालिकों को अदालतों के आदेशों के तहत निर्धारित मुआवजे से अधिक राशि दी गई थी। यदि ऐसा हुआ तो इसके लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार थे, इसकी जिम्मेदारी तय करना भी जांच का हिस्सा था।
इसके अलावा अदालत ने यह भी जानने को कहा था कि कहीं लाभार्थियों और अधिकारियों के बीच किसी प्रकार की सांठगांठ तो नहीं थी, तथा क्या प्राधिकरण की मुआवजा वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता का अभाव रहा।
एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दौरान कुल 1,198 मामलों में भूमि स्वामियों को बढ़े हुए मुआवजे का भुगतान होने की बात सामने आई। हालांकि इनमें से 1,167 मामलों में भुगतान अदालतों के आदेशों के आधार पर किया गया था। केवल 20 मामलों में निर्धारित मानकों से अधिक भुगतान की स्थिति पाई गई, जिसकी अलग से जांच की जा रही है।
यह मामला लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन है और पहले भी इसकी जांच एसआईटी से कराई जा चुकी है। इसके बाद अदालत ने दोबारा विस्तृत जांच के निर्देश दिए थे। अब दूसरी बार की जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है, जिसे राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई के दौरान अदालत एसआईटी की रिपोर्ट और सरकार द्वारा मांगे गए अतिरिक्त समय पर विचार करेगी।
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