दिल्ली विधानसभा में CAG रिपोर्ट पर बड़ा खुलासा: पढ़िए विधानसभा अध्यक्ष की जुबानी
टेन न्यूज नेटवर्क
New Delhi News (27 मार्च 2026): दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता (Vijender Gupta) ने सदन में 23 मार्च 2026 को पटल पर रखी गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG – Comptroller and Auditor General) की विभिन्न रिपोर्टों पर चर्चा के दौरान कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 25 मार्च को सदन में रिपोर्ट संख्या 5, वर्ष 2024 पर चर्चा हुई, जिसमें ‘शीश महल’ (Sheesh Mahal Controversy) से जुड़े निष्कर्ष सामने आए। इसके साथ ही रिपोर्ट में GST, VAT, स्टाम्प शुल्क, पंजीकरण शुल्क, मोटर वाहन कर और आबकारी (Excise) की वसूली में भी गंभीर वित्तीय अनियमितताओं (Financial Irregularities) का जिक्र किया गया।
विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि CAG रिपोर्ट में सूचना एवं प्रचार निदेशालय (Directorate of Information & Publicity), समाज कल्याण (Social Welfare), महिला एवं बाल विकास (Women & Child Development) और राजस्व विभाग (Revenue Department) के कामकाज में भी कई कमियां सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इन रिपोर्टों पर सदन में विस्तृत चर्चा की गई और कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए।
विधानसभा अध्यक्ष ने रिपोर्ट संख्या 3, वर्ष 2022 का जिक्र करते हुए बताया कि इसमें गृह विभाग (Home Department), सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण (Irrigation & Flood Control), शहरी विकास (Urban Development), समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास, पर्यटन (Tourism), UTCS और NSUT जैसे विभागों में गंभीर अनियमितताओं और प्रशासनिक कमियों को उजागर किया गया है।
रिपोर्ट संख्या 1, वर्ष 2023 में देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों (Children in Need of Care and Protection) पर की गई निष्पादन लेखापरीक्षा (Performance Audit) में भी कई चिंताजनक तथ्य सामने आए। वर्ष 2018-19 से 2020-21 तक की अवधि को शामिल करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग (DWCD), दिल्ली राज्य बाल संरक्षण समिति (DSCPS), राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन अभिकरण (SARA), बाल कल्याण समितियां (CWCs), जिला बाल संरक्षण इकाइयां (DCPUs) तथा बाल देखभाल संस्थाओं (CCIs) के रिकॉर्ड की जांच की गई।
रिपोर्ट में पाया गया कि बच्चों के लिए निधि जारी करने में देरी, दत्तक ग्रहण (Adoption) प्रक्रिया में विलंब, बाल देखभाल संस्थाओं में कर्मचारियों की कमी, अपर्याप्त बुनियादी ढांचा (Infrastructure) और सीमित चिकित्सा सुविधाएं जैसी गंभीर कमियां मौजूद थीं। इसके अलावा पालन योजना (Foster Care Scheme) को भी प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया गया, जिसका उद्देश्य जरूरतमंद बच्चों के माता-पिता को आर्थिक सहायता देना और नागरिकों को बच्चों की देखभाल के लिए प्रोत्साहित करना था।
इसके अलावा रिपोर्ट संख्या 4, वर्ष 2025 में दिल्ली के प्रमुख विश्वविद्यालयों के कामकाज में भी कई खामियां उजागर हुईं। अप्रैल 2018 से मार्च 2023 की अवधि को शामिल करते हुए गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU), दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (DTU) और दिल्ली फार्मास्यूटिकल साइंसेज एवं रिसर्च विश्वविद्यालय (DPSRU) की विस्तृत लेखापरीक्षा की गई। रिपोर्ट में शैक्षणिक कार्यप्रणाली, मानव संसाधन प्रबंधन (Human Resource Management), अधोसंरचना सुविधाएं, वित्तीय प्रबंधन (Financial Management) और आंतरिक नियंत्रण (Internal Control) में कई विसंगतियों का उल्लेख किया गया है।
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि इन रिपोर्टों में सामने आई कमियां प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता की आवश्यकता को दर्शाती हैं। उन्होंने बताया कि सदन में इन मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई और संबंधित विभागों से जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
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