पिछली सरकारों में कैसा रहा बजट का ट्रेंड, जानें किन सेक्टर्स पर रहा फोकस | टेन न्यूज विशेष रिपोर्ट
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (24 March 2026): दिल्ली का बजट पिछले एक दशक में लगातार बदलाव और विस्तार का गवाह रहा है। शुरुआती वर्षों में यह बुनियादी जरूरतों पर केंद्रित था, लेकिन समय के साथ इसका आकार और दृष्टिकोण दोनों बदले। कभी तेजी से वृद्धि हुई तो कभी व्यावहारिक कारणों से गिरावट भी देखी गई। सरकार ने हर साल अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार बजट को ढाला। इस पूरे दौर में शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर मुख्य केंद्र में रहे। अब यह बजट हरित विकास और तकनीकी सुधार की ओर भी बढ़ चुका है।
आम आदमी पार्टी की अरविंद केजरीवाल सरकार ने 2015-16 में ₹41,129 करोड़ का अपना पहला पूर्ण बजट पेश किया। यह बजट पूरी तरह से बुनियादी ढांचे और सामाजिक सेवाओं पर केंद्रित था। शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए सरकारी स्कूलों और मोहल्ला क्लीनिक पर ध्यान दिया गया। इस साल बजट का उद्देश्य जनता को तत्काल राहत देना था। राजस्व सीमित था, लेकिन खर्च को प्राथमिकता के आधार पर तय किया गया। यह साल दिल्ली के नए विकास मॉडल की नींव बना।
2016-17 में बजट बढ़कर ₹46,600 करोड़ हो गया, जो लगभग 13% की वृद्धि थी। यह दिखाता है कि सरकार ने संसाधनों को बढ़ाने में सफलता पाई। शिक्षा क्षेत्र में स्कूलों का विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया गया। सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी खर्च बढ़ाया। इस साल विकास की गति तेज करने की कोशिश की गई। बजट का झुकाव सामाजिक क्षेत्रों की मजबूती की ओर रहा।
2017-18 में बजट ₹48,000 करोड़ हुआ, यानी वृद्धि की रफ्तार थोड़ी धीमी रही। सरकार ने पहले से चल रही योजनाओं को स्थिर करने पर ध्यान दिया। शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ-साथ परिवहन क्षेत्र को भी मजबूती दी गई। यह साल गुणवत्ता सुधार का रहा, न कि केवल खर्च बढ़ाने का। विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। इससे बजट का प्रभाव जमीन पर दिखने लगा।
2018-19 में बजट ₹53,000 करोड़ तक पहुंच गया, जो 10% से अधिक की वृद्धि थी। इस साल शिक्षा मॉडल और स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया गया। सड़क और शहरी विकास पर भी खर्च बढ़ाया गया। सरकार ने सामाजिक योजनाओं को व्यापक स्तर पर लागू किया। यह साल विकास की गति बढ़ाने वाला साबित हुआ और बजट के विस्तार का संकेत बना।
2019-20 में बजट ₹60,000 करोड़ हो गया, यानी करीब 13% की वृद्धि हुई। इस साल परिवहन, सड़क और शहरी विकास पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया गया। बस सेवाओं और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के प्रयास हुए। सरकार ने राजधानी को आधुनिक शहर बनाने का लक्ष्य रखा। सामाजिक योजनाएं जारी रहीं लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर मुख्य फोकस बना रहा। यह साल आर्थिक विस्तार का प्रतीक बना।
2020-21 में बजट ₹65,000 करोड़ रखा गया, जब देश कोविड-19 संकट से जूझ रहा था। इस दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र पर सबसे ज्यादा खर्च किया गया। अस्पतालों, टेस्टिंग और इलाज की सुविधाओं को मजबूत किया गया। अन्य क्षेत्रों में खर्च सीमित रखा गया। यह साल आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने का रहा। बजट ने संकट के समय सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं।
2021-22 में बजट ₹69,000 करोड़ तक पहुंचा, जो लगभग 6% की वृद्धि थी। यह साल कोविड के बाद आर्थिक सुधार और पुनर्निर्माण का था। सरकार ने रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से गति दी। स्वास्थ्य और शिक्षा पर निवेश जारी रखा गया। संतुलित विकास की रणनीति अपनाई गई। बजट ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में अहम भूमिका निभाई।
2022-23 में बजट ₹75,800 करोड़ हो गया, जो करीब 10% की वृद्धि दर्शाता है। यह आर्थिक मजबूती और राजस्व सुधार का संकेत था। सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार किया। इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी विकास पर भी जोर बढ़ाया गया। इस साल विकास की गति फिर तेज होती दिखाई दी। बजट ने राजधानी को नए स्तर पर पहुंचाया।
2023-24 में बजट ₹78,800 करोड़ तक पहुंच गया, जो लगभग 4% की वृद्धि थी। सरकार ने अपने स्थापित विकास मॉडल को जारी रखा। शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन में निवेश बरकरार रखा गया। यह साल स्थिरता और वित्तीय अनुशासन का संकेत बना। बजट ने नियंत्रित और संतुलित वृद्धि को दर्शाया।
2024-25 में बजट घटकर ₹76,000 करोड़ रह गया, जो करीब 3.5% की गिरावट थी। यह अरविंद केजरीवाल सरकार के कार्यकाल में पहली बार हुआ। हालांकि सरकार ने इसे व्यावहारिक और यथार्थवादी कदम बताया। संशोधित बजट के मुकाबले यह अभी भी अधिक था। यह साल वित्तीय अनुशासन और सटीक अनुमान का प्रतीक बना। इससे बजट प्रबंधन की नई रणनीति सामने आई।
2025-26 का समय बजट संतुलन और पुनर्गठन का दौर रहा। सरकार ने आय और व्यय के बीच संतुलन बनाने पर ध्यान दिया। हरित और इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं की तैयारी की गई। नीतिगत सुधारों पर जोर दिया गया। यह साल बड़े बदलाव से पहले की तैयारी का चरण बना। सरकार ने दीर्घकालिक विकास की नींव मजबूत की।
2026 में बजट ₹1,03,700 करोड़ तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा बजट है। यह पिछले साल से लगभग 3.7% अधिक है। इस बार सबसे बड़ा फोकस ‘ग्रीन बजट’ पर रहा। पर्यावरण, स्वच्छ ऊर्जा और प्रदूषण नियंत्रण पर भारी निवेश किया गया। इंफ्रास्ट्रक्चर और परिवहन में भी बड़े प्रोजेक्ट्स शामिल किए गए। यह बजट भविष्य के सतत विकास मॉडल को दर्शाता है।
पूरे दशक में सेक्टर फोकस लगातार बदलता रहा। शुरुआत में शिक्षा और स्वास्थ्य प्रमुख रहे। मध्य वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर और परिवहन पर जोर बढ़ा। कोविड काल में स्वास्थ्य सबसे बड़ा सेक्टर बन गया। अब पर्यावरण और हरित ऊर्जा पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। यह बदलाव दिल्ली की बदलती जरूरतों को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।।
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