ग्रेटर नोएडा के केंद्रीय विहार में AoA चुनाव विवाद: 80% फ्लैट मालिक वोट डालने से बाहर

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (24/03/2026):‌केंद्रीय विहार ग्रेटर नोएडा, सेक्टर फाई-2, ग्रेटर नोएडा स्थित एक बड़े आवासीय परिसर में Apartment Owners Association (AoA) चुनाव को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। लगभग 1,794 फ्लैट वाले इस परिसर में आरोप है कि नई और कथित रूप से गैर-वैध शर्तों के आधार पर बड़ी संख्या में फ्लैट मालिकों को वोट देने से वंचित किया जा रहा है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, नए नियमों के तहत केवल लगभग 350 फ्लैट मालिकों को ही सदस्य माना गया है। इस स्थिति में 80% से अधिक निवासी चुनाव प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं, जिससे चुनाव की वैधता और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।

नए सदस्यता नियमों पर विवाद

निवासी डॉ. ओंकार तिवारी सहित अन्य लोगों का आरोप है कि वर्तमान एड-हॉक AoA पदाधिकारियों द्वारा पूर्व में जमा किए गए सदस्यता फॉर्म और फ्लैट मूल्य की 1.5% राशि को अमान्य बताया जा रहा है।नई शर्तों के अनुसार: सभी फ्लैट मालिकों को पुनः सदस्यता फॉर्म भरना अनिवार्य किया गया है। 1000 की नई शुल्क राशि जमा करने को कहा जा रहा है। इन्हीं शर्तों के आधार पर मतदान का अधिकार सीमित किए जाने का आरोप है।

पंजीकरण प्रक्रिया पर उठे सवाल

निवासियों का कहना है कि‌ पहले ही सभी फ्लैट मालिकों से सदस्यता फॉर्म लिए जा चुके थे,‌ 1.5% राशि AoA खाते में जमा कराई गई थी और जनरल बॉडी मीटिंग (GBM) में एड-हॉक AoA का गठन किया गया था।‌‌सदस्यों की सूची डिप्टी रजिस्ट्रार को सौंपी जा चुकी थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि ये प्रक्रियाएं अमान्य थीं, तो AoA का पंजीकरण किस आधार पर किया।

मेंटेनेंस शुल्क को लेकर नया विवाद

चुनाव से पहले मेंटेनेंस शुल्क को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। निवासियों का आरोप है कि मासिक मेंटेनेंस शुल्क को मतदान के लिए अनिवार्य शर्त बना दिया गया है, जबकि इस संबंध में किसी भी जनरल बॉडी मीटिंग (GBM) से अनुमोदन नहीं लिया।

विशेषज्ञों के अनुसार, GBM की स्वीकृति के बिना लगाया गया कोई भी शुल्क कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होता।
इसके बावजूद, मेंटेनेंस का भुगतान न करने वाले निवासियों को “डिफॉल्टर” बताकर चुनाव प्रक्रिया से बाहर करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

डिफॉल्टर की परिभाषा पर भ्रम

AoA के मॉडल बायलॉज के अनुसार, डिफॉल्टर वही सदस्य माना जाता है जिसकी देनदारी पिछले वित्तीय वर्ष की हो और जो अगले वित्तीय वर्ष के दिसंबर तक भी बकाया रहे।
इस आधार पर, हालिया मेंटेनेंस बकाया को आधार बनाकर किसी सदस्य को डिफॉल्टर घोषित करना नियमों के विरुद्ध बताया जा रहा है।

कानूनी स्थिति

उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट एक्ट 2010 के अनुसार, फ्लैट का स्वामित्व स्वतः AoA की सदस्यता प्रदान करता है। ऐसे में नई सदस्यता की बाध्यता, अतिरिक्त शुल्क की शर्तें और डिफॉल्टर घोषित करने की प्रक्रिया को कई विशेषज्ञ कानूनी रूप से संदिग्ध और चुनौती योग्य मान रहे हैं।

प्रशासन से जवाब की मांग

निवासियों ने डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार से स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग की है। मुख्य प्रश्न इस प्रकार हैं:
क्या पुरानी सदस्यता और 1.5% जमा राशि वैध है?
क्या बिना GBM अनुमोदन के मेंटेनेंस शुल्क वसूला जा सकता है?‌ क्या नए सदस्यता नियम आधिकारिक हैं या भ्रामक तरीके से लागू किए जा रहे हैं? हालांकि, अब तक इस मामले में कोई स्पष्ट प्रशासनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

यदि वर्तमान शर्तों के साथ चुनाव कराए जाते हैं, तो चुनाव की वैधता, पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं। साथ ही बड़े स्तर पर कानूनी विवाद की संभावना भी जताई जा रही है।

यह मामला अब केवल एक आवासीय सोसाइटी का नहीं, बल्कि शहरी आवासीय प्रबंधन में लोकतांत्रिक अधिकारों, पारदर्शिता और विधिक प्रक्रिया की एक महत्वपूर्ण परीक्षा बनता जा रहा है।।


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