सुप्रीम कोर्ट से एल्विश यादव को बड़ी राहत, सांपों के जहर से जुड़े केस में FIR रद्द

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (19/03/2026): मशहूर यूट्यूबर और रियलिटी शो बिग बॉस (Bigg Boss) से पहचान बनाने वाले एल्विस यादव (Elvish Yadav) को सांपों के जहर से जुड़े चर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट से अहम राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को खारिज करते हुए FIR को रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद करीब सात महीनों से लंबित कानूनी विवाद पर विराम लग गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पहले ही उत्तर प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता से जवाब तलब किया था और जांच से जुड़ी कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी थी। अब अंतिम सुनवाई में अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर मामले को समाप्त कर दिया।

यह मामला नवंबर 2023 में दर्ज हुई एक FIR से जुड़ा है, जिसमें एल्विश यादव समेत छह लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। शिकायत में कहा गया था कि नोएडा और दिल्ली-NCR के फार्म हाउसों में आयोजित कथित रेव पार्टियों में जिंदा सांपों का इस्तेमाल किया जाता था और नशे के लिए उनके जहर का उपयोग किया जाता था।

जांच के दौरान पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनके कब्जे से कई जहरीले सांप और जहर बरामद होने का दावा किया गया था। बरामद सांपों में कोबरा, अजगर और अन्य प्रजातियां शामिल थीं। इसके आधार पर आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और NDPS एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए नोएडा पुलिस ने 17 मार्च 2024 को एल्विश यादव को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया, लेकिन कुछ दिनों बाद उन्हें जमानत मिल गई। इसके बावजूद मामला लगातार सुर्खियों में बना रहा।

एल्विश यादव ने शुरुआत से ही अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना था कि उन्हें बिना ठोस सबूत के फंसाया गया है और उनका अन्य आरोपियों से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी दलील दी कि उनके पास से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई।

इस मामले में पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एल्विश की याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि आरोपों की सच्चाई का परीक्षण ट्रायल के दौरान होगा। इसके बाद एल्विश ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले की गहन समीक्षा की। अंततः अदालत ने FIR को निरस्त कर एल्विश यादव को राहत प्रदान की।

यह पूरा मामला पशु अधिकार संगठन People for Animals की शिकायत के बाद सामने आया था, जिसकी स्थापना Maneka Gandhi ने की है। शिकायत में दावा किया गया था कि अवैध गतिविधियों में सांपों का इस्तेमाल किया जा रहा है और यह वन्यजीव कानूनों का उल्लंघन है। इस मामले के खत्म होने के बाद अब जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और ऐसे मामलों में सबूतों की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से यह संदेश जाता है कि गंभीर आरोपों के मामलों में ठोस और प्रमाणिक साक्ष्य होना बेहद जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने एल्विश यादव को बड़ी राहत दी है, वहीं यह मामला कानून, सोशल मीडिया प्रभाव और जांच एजेंसियों की भूमिका पर एक नई बहस भी छेड़ गया है। फिलहाल, इस हाई-प्रोफाइल केस का पटाक्षेप हो चुका है, लेकिन इससे जुड़े सवाल अभी भी चर्चा में बने हुए हैं।


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