शनि-राहु से नहीं, अपने कर्मों से डरें: ज्योतिष डर नहीं, समझ का विज्ञान है: रुचिका आर. शर्मा | Astrologer | Ten Talks

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (12/03/2026): अग्रणी डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म “टेन न्यूज़ नेटवर्क” द्वारा जनहित और राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों को सकारात्मक और निष्पक्ष रूप से सामने लाने की अपनी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मंगलवार, 10 मार्च को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में गलगोटियास यूनिवर्सिटी के सहयोग से एक विशेष ज्ञानवर्धक टॉक शो “टेन टॉक्स” का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राजनीति, शिक्षा, कानून, समाज सेवा और अध्यात्म जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने हिस्सा लेकर अपने अनुभव और विचार साझा किए।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद पी. संतोष कुमार, अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद और राज्यसभा सांसद पी. विल्सन उपस्थित रहे। सभी मुख्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर मंच से देश के विकास, लोकतांत्रिक मूल्यों और समाज में सकारात्मक योगदान देने वाले विभिन्न क्षेत्रों की भूमिका पर व्यापक चर्चा की गई।

कार्यक्रम में प्रसिद्ध ज्योतिषी रुचिका आर. शर्मा ने अपने विचार रखते हुए ज्योतिष से जुड़े कई प्रचलित भ्रमों को दूर करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग शनि, राहु, केतु या मांगलिक दोष को लेकर भयभीत रहते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि जीवन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका व्यक्ति के कर्मों की होती है।

उन्होंने कहा, ज्योतिष शास्त्र डराने का माध्यम नहीं बल्कि समझ का विज्ञान है। शनि, राहु और केतु से डरने की आवश्यकता नहीं है। यदि डरना है तो अपने कर्मों से डरना चाहिए, क्योंकि जीवन में वही फल देता है जो हम कर्म करते हैं। रुचिका शर्मा ने विशेष रूप से विवाह से जुड़े मांगलिक दोष को लेकर फैली भ्रांतियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि समाज में यह गलत धारणा बना दी गई है कि मांगलिक दोष विवाह या जीवन के लिए घातक होता है, जबकि ऐसा कोई प्रमाण नहीं है।

उन्होंने कहा, मांगलिक दोष कभी भी किसी की मृत्यु का कारण नहीं बना है और न ही बन सकता है। मंगल साहस, ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक है। यदि मंगल का प्रभाव न हो तो कोई भी व्यक्ति खेल, सेना या प्रशासन जैसे क्षेत्रों में सफल नहीं हो सकता।उन्होंने राहु-केतु को लेकर भी लोगों के मन में मौजूद डर को अंधविश्वास बताया। उनका कहना था कि राहु और केतु केवल खगोलीय बिंदु (नोड्स) हैं और उनका अर्थ जीवन में भौतिकता और आधुनिकता से भी जुड़ा हुआ है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आज की डिजिटल दुनिया में मोबाइल फोन, इंटरनेट और तकनीक का बढ़ता उपयोग भी एक तरह से राहु के प्रभाव का प्रतीक माना जा सकता है। ऐसे में राहु से डरने की बजाय उसे समझने की आवश्यकता है।

युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया और इंटरनेट पर मिलने वाली अधूरी या भ्रामक जानकारी से सावधान रहने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि जैसे किसी बीमारी के लिए डॉक्टर के पास जाना जरूरी होता है, वैसे ही ज्योतिष या किसी भी ज्ञान क्षेत्र में सही मार्गदर्शन के लिए विशेषज्ञ से ही सलाह लेनी चाहिए।

उन्होंने कहा, रील या वीडियो देखकर जीवन की समस्याओं का समाधान ढूँढना सही तरीका नहीं है। हर व्यक्ति की परिस्थिति अलग होती है, इसलिए सही सलाह के लिए विशेषज्ञ से ही मार्गदर्शन लेना चाहिए। रुचिका शर्मा ने अपने संबोधन के अंत में जीवन में सकारात्मकता और संस्कारों के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने माता-पिता, गुरुजनों, परिवार और समाज का सम्मान करता है तो जीवन के अधिकांश ग्रह दोष स्वतः ही शांत हो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि पिता को सूर्य, माँ को चंद्रमा, गुरु को बृहस्पति और समाज के श्रमिक वर्ग को शनि का प्रतीक मानते हुए उनका सम्मान करना चाहिए। उनके अनुसार यही वास्तविक ज्योतिष और जीवन का संतुलन है।

इस विशेष कार्यक्रम में प्रोफेसर रूबी मिश्रा (प्राचार्य, भगिनी निवेदिता कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय), एडवोकेट डॉ. ए.पी. सिंह (वरिष्ठ अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय), डॉ. आदिश सी अग्रवाला (वरिष्ठ अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय), डॉ. खुशबू सिंह (हस्तशिल्प निर्यातक एवं निदेशक, आर्य फैशन), आनंदिता बासु (क्विज मास्टर), सुश्री रुचिका आर. शर्मा (प्रसिद्ध ज्योतिषी), डॉ. प्रो. वंदना शर्मा ‘दिया’ (प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय एवं अद्वैत वेदांत दर्शन की विद्वान), प्रोफेसर सविता झा (प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय एवं सामाजिक कार्यकर्ता), ज्योतिष रत्न गुरुजी गौतम ऋषि (संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय गुरुकुल एवं गौशाला अनुसंधान संस्थान), मेजर डॉ. प्राची गर्ग (एमसी एवं कारगिल योद्धा), पुरुषोत्तम बिहारी (चिंतक व लेखक) तथा आलोक द्विवेदी (वरिष्ठ पत्रकार एवं अध्यक्ष, नोएडा मीडिया क्लब) सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान सभी वक्ताओं ने अपने-अपने क्षेत्र में प्राप्त अनुभवों, संघर्षों और सफलता की प्रेरक यात्राओं को साझा किया। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षा, कानून, मीडिया, संस्कृति और अध्यात्म जैसे विभिन्न क्षेत्र किस प्रकार विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने उम्मीद जताई कि “टेन टॉक्स” जैसे संवादात्मक मंच समाज में सकारात्मक विचार-विमर्श को बढ़ावा देंगे और आने वाली पीढ़ी को सही दिशा में प्रेरित करने का कार्य करेंगे।

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